भालुओं के आतंक से दहशत में केदारनाथ घाटी, सरकार बताए रोकथाम की योजना: मनोज रावत
गौशालाओं और महिलाओं पर बढ़ते हमले
मनोज रावत ने कहा कि विशेष रूप से भालुओं का आतंक इतना बढ़ गया है कि वे अब न केवल जंगलों में, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि भालू अब तक कई ग्रामीणों की गौशालाओं को ध्वस्त कर चुके हैं और बड़ी संख्या में मवेशियों को अपना निवाला बना चुके हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जंगल में घास लेने जा रही महिलाओं और पैदल चल रहे राहगीरों पर भी जानलेवा हमले लगातार बढ़ रहे हैं।
पलायन की बढ़ती आशंका
पूर्व विधायक ने सरकार से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि आखिर हिंसक वन्यजीवों की रोकथाम के लिए सरकार की क्या योजना है? उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि सरकार ने समय रहते इन हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो डर के साये में जी रहे पहाड़ के लोग बड़ी संख्या में पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे।"यदि इस समस्या का हल नहीं हुआ तो जनता के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ आंदोलन करना पड़ेगा।
संवेदनशीलता की कमी का आरोप
पत्रकार वार्ता में रावत ने कहा कि लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन सरकार के पास इस समस्या का कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की।
इस अवसर पर कांग्रेस नेता प्रकाश रावत, प्रमोद बिष्ट और संदीप सहित कई अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।






