चार साल बाद भी अधूरा पुल: गबनी–हाट–अरखुंड के ग्रामीण बेहाल, मनोज रावत ने उठाए सवाल

चार साल बाद भी अधूरा पुल: गबनी–हाट–अरखुंड के ग्रामीण बेहाल, मनोज रावत ने उठाए सवाल
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 चार साल बाद भी अधूरा पुल: गबनी–हाट–अरखुंड के ग्रामीण बेहाल, मनोज रावत ने उठाए सवाल।


गबनी–हाट–अरखुंड को जोड़ने वाला पुल पिछले चार वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण कार्य की धीमी गति ने अब लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।


पुल के अधूरे होने के कारण गबनी, हाट और अरखुंड समेत कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है। ग्रामीणों को रोज़ाना ऊबड़-खाबड़ रास्तों और बरसाती नालों को पार कर आवाजाही करनी पड़ रही है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

इस मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने भी कड़ा विरोध दर्ज किया है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चार सालों में भी पुल का निर्माण पूरा न होना सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार के चार सालों के कार्यकाल में जनता में भारी निराशा है और विकास के दावे जमीनी स्तर पर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासन-प्रशासन इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर गंभीर नहीं है। बार-बार शिकायत और मांग के बावजूद निर्माण कार्य में कोई तेजी नहीं लाई गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

चार साल का लंबा इंतजार अब लोगों की सहनशक्ति से बाहर होता जा रहा है और अधूरा पुल सरकार के विकास दावों पर बड़ा सवालिया निशान बन गया है।

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