स्थानीय रोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय सेना की महत्वपूर्ण पहल।
चमोली | 19 अप्रैल 2026
उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में स्थानीय रोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय सेना की महत्वपूर्ण पहल “यार्न्स ऑफ योर” के तहत बड़ा कदम उठाया गया। लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, मध्य कमान (सूर्य कमान) प्रमुख, अपनी धर्मपत्नी के साथ चमोली पहुंचे और स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों के लिए समर्पित ऑनलाइन वेबसाइट का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सेना के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक बुनकरी से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिन्हें अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
🔶 पारंपरिक हुनर को मिलेगा नया बाजार
“यार्न्स ऑफ योर” पहल का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों की पारंपरिक बुनकरी और हस्तशिल्प कला को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक तकनीक और डिज़ाइन से जोड़ना है। इस योजना के तहत स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
🔶 इन गांवों से हुई शुरुआत
इस योजना की शुरुआत चमोली के सीमांत गांव माणा और नीति से की गई थी। अब इसे विस्तार देते हुए न्यू पैंगसी और रैणी गांवों में भी बुनकर कार्यशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
🔶 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से वैश्विक पहुंच
कार्यक्रम के दौरान “यार्न्स ऑफ योर” की कमर्शियल वेबसाइट भी लॉन्च की गई, जिसके माध्यम से स्थानीय उत्पाद अब देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच सकेंगे। इससे कारीगरों को उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है और उनकी आय में वृद्धि होगी।
🔶 महिलाओं में दिखा उत्साह
स्थानीय महिलाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उन्हें न सिर्फ रोजगार मिला है, बल्कि अपने पारंपरिक हुनर को पहचान भी मिल रही है।
🔶 पलायन रोकने में मिलेगी मदद
भारतीय सेना की यह पहल सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाकर पलायन जैसी समस्या को कम करने में भी सहायक साबित हो सकती है। साथ ही यह क्षेत्रीय विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


