गुलदार के आतंक से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, फॉरेस्टर समेत 06 वनकर्मियों को बनाया बंधक।

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गुलदार के आतंक से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, फॉरेस्टर समेत 06 वनकर्मियों को बनाया बंधक।

चमोली: गुलदार के आतंक से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, फॉरेस्टर समेत 06 वनकर्मियों को रस्सियों से बांधकर बनाया बंधक।

चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार का खौफ अब जन-आक्रोश में बदलने लगा है। चमोली जनपद के उजठिया ,कुनीगाड गांव में बुधवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को रस्सियों से बांधकर करीब 02 घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि गुलदार लगातार मवेशियों को निवाला बना रहा है, लेकिन वन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।

घटना की शुरुआत मंगलवार देर रात हुई, जब उजिटिया निवासी राजेंद्र मेहरा की गोशाला में एक आदमखोर गुलदार घुस गया। गुलदार ने वहां बंधी एक गर्भवती गाय और 2 साल के बछड़े को बेरहमी से मार डाला। बुधवार सुबह जब राजेंद्र की पत्नी कस्तूरा देवी गोशाला पहुंचीं, तो वहां का मंजर देखकर उनकी चीख निकल गई। मवेशियों के खून से लथपथ शव देख पूरा गांव इकट्ठा हो गया।

ग्रामीणों का कहना है कि घटना की सूचना सुबह ही दे दी गई थी, लेकिन वन विभाग की टीम करीब 09 बजे गांव पहुंची। टीम की इस 'सुस्ती' ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। खासकर महिलाओं में भारी नाराजगी देखी गई। गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे एक फॉरेस्टर समेत 06 वनकर्मियों को पकड़ लिया और उन्हें रस्सियों से बांधकर बंधक बना लिया।

"अल्मोड़ा में एक्शन, तो चमोली में देरी क्यों?"

ग्राम प्रधान दीपा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र नेगी ने विभाग पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा जिले में मवेशियों के शिकार के बाद तुरंत पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ा गया, लेकिन चमोली के गांवों में अनुमति के नाम पर केवल टालमटोल की जा रही है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि विभाग का अमला केवल औपचारिकता निभाने आता है, जबकि उनकी आजीविका (मवेशी) खत्म हो रही है।

नरभक्षी होने की आशंका, क्षेत्र में हाई अलर्ट

जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने आशंका जताई है कि यह गुलदार नरभक्षी हो सकता है। पिछले एक सप्ताह में गुलदार ने कई घटनाओं को अंजाम दिया है:

भंडारीखोड: तीन गायों का शिकार।

उजिटिया: दिनदहाड़े पालतू कुत्ते को उठाया।

रंगचौणा: गोशाला में घुसकर गाय को मारा।

फिलहाल, उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद वनकर्मियों को मुक्त किया गया, लेकिन गांव में तनाव बरकरार है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गुलदार को पिंजरे में कैद नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।

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