कुछ ही दिनों में उखड़ी सड़क, डामरीकरण पर उठे सवाल — ग्रामीणों में रोष।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में न तो तय मानकों का पालन किया गया और न ही इसकी उचित निगरानी की गई। सड़क की वर्तमान स्थिति ठेकेदार की लापरवाही और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करती है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकताएं निभा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, डामरीकरण कार्य पूरी तरह से मानकों के विपरीत किया गया है, जिससे इसमें भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई जा रही है। जनता के टैक्स के पैसों से बनी इस सड़क की खराब हालत को लोग सीधे तौर पर धन की बर्बादी मान रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, सड़क को पूरी तरह से उखाड़कर दोबारा गुणवत्ता मानकों के अनुरूप निर्माण कराने की मांग भी उठाई गई है, ताकि क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और टिकाऊ सड़क मिल सके।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


