अंकिता भंडारी हत्याकांड में 'उत्तराखंड बंद' का मिला-जुला असर ।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों द्वारा 'उत्तराखंड बंद' का आह्वान किया गया है। इस बंद का प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।
प्रदर्शनकारी अंकिता भंडारी केस की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में CBI से कराने और मामले में संलिप्त 'वीआईपी' (VIP) के नाम के खुलासे की मांग कर रहे हैं।
चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में बंद का व्यापक असर दिखा, जहाँ कई मुख्य बाजार बंद रहे। श्रीनगर और श्रीकोट में भी दुकानें बंद रहीं।
देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और ऊधम सिंह नगर में जनजीवन सामान्य रहा, हालांकि कुछ संगठनों ने रैलियां निकालीं और प्रदर्शन किया।
देहरादून और ऋषिकेश के कई व्यापारिक संगठनों (जैसे दून उद्योग व्यापार मंडल) ने इस बंद का समर्थन नहीं किया है, जिससे वहां दुकानें खुली रहीं। उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री द्वारा CBI जांच की सिफारिश के बाद अब बंद का कोई औचित्य नहीं है।
पुलिस महानिरीक्षक (गढ़वाल रेंज) ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और जबरन दुकान बंद कराने वालों को सख्त चेतावनी दी गई है।
सार्वजनिक परिवहन बस और टैक्सी सेवाएं अधिकतर स्थानों पर सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।
आवश्यक सेवाएं: अस्पताल, मेडिकल स्टोर और दूध-सब्जी जैसी आवश्यक सेवाएं बंद से मुक्त हैं।
पर्वतीय जिलों के मुख्य बाजार आंशिक रूप से बंद हैं, जबकि मैदानी शहरों के बड़े बाजार खुले हुए हैं।
सरकार ने हाल ही में इस केस की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की है, लेकिन 'अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच' का कहना है कि यह कदम पर्याप्त नहीं है।



