उत्तर-पश्चिमी हिमालय में 'हिमपात का अकाल': पिछले 5 सालों में बर्फबारी में 25% की बड़ी गिरावट।
औसत वर्षा से दूर वर्तमान रुझान
नई दिल्ली/जम्मू: उत्तर भारत में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। आईआईटी जम्मू (IIT Jammu) के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शोध के अनुसार, पिछले पांच वर्षों (2021-2026) के दौरान उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी में औसतन 25% की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 1971 से 2020 तक के लंबी अवधि के औसत (LPA) के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर भारत में इस अवधि के दौरान लगभग 184.3 मिमी वर्षा होनी चाहिए। हालांकि, वर्तमान रुझान इस ऐतिहासिक औसत से काफी अलग नजर आ रहे हैं। दिसंबर 2025 में भी उत्तराखंड जैसे राज्यों में वर्षा और हिमपात में भारी कमी (लगभग 100%) देखी गई, जो जलवायु परिवर्तन के गहरे प्रभाव की ओर इशारा करती है।
अध्ययन के मुख्य बिंदु:
बर्फबारी में कमी: पिछले 40 वर्षों (1980-2020) के औसत के मुकाबले पिछले 5 वर्षों में हिमपात में 25% की कमी आई है।
हिम सूखा (Snow Drought): शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हिमालयी क्षेत्र में 'हिम सूखे' की स्थिति बार-बार बन रही है, विशेषकर 3,000 से 6,000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में।
कारण: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की तीव्रता में कमी और बढ़ते तापमान को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है।
प्रभाव: बर्फबारी में इस कमी का सीधा असर नदियों के जल स्तर, कृषि, बागवानी और स्थानीय पर्यटन पर पड़ने की आशंका है।
यह अध्ययन हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र और जल सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।


