औली विंटर कार्निवाल: उत्सव के मंच पर 'सियासी' कब्जा, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से उपजा आक्रोश।
श्रेय लेने की होड़ में मर्यादा तार-तार।
ज्योतिर्मठ (जोशीमठ)। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल औली में आयोजित 'विंटर कार्निवाल' अपनी भव्यता और खेलों के बजाय अब राजनीतिक विवादों के कारण चर्चा में है। आरोप है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम को सत्ताधारी दल के नेताओं ने अपना 'निजी अखाड़ा' बना लिया है। मंच पर भाजपा नेताओं के वर्चस्व और स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जानबूझकर की गई अनदेखी ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, कार्निवाल के मंच पर भाजपा जिलाध्यक्ष, कर्णप्रयाग के भाजपा विधायक और बीकेटीसी (BKTC) के उपाध्यक्ष पूरी तरह जमे रहे। वहीं दूसरी ओर, प्रोटोकॉल को ताक पर रखते अनूप नेगी: ब्लॉक प्रमुख, ज्योतिर्मठ।, देवेश्वरी शाह: नगर पालिका अध्यक्ष, ज्योतिर्मठ।,स्थानीय सभासद: विभिन्न वार्डों के निर्वाचित प्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मंच से दूर रखा गया।
नगर पालिका अध्यक्ष देवेश्वरी शाह का कहना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों का अपमान नहीं है, बल्कि ज्योतिर्मठ की उस जनता का अपमान है जिन्होंने इन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर भेजा है। आरोप लगाया जा रहा है कि आयोजक मंडल ने पूरी तरह से सत्ताधारी दल के दबाव में काम किया और प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हुए स्थानीय नेताओं को हाशिए पर धकेल दिया।
"आयोजक मंडल ने भाजपा नेताओं के इशारे पर स्थानीय प्रतिनिधियों को अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक सरकारी आयोजन को पूरी तरह से राजनीतिक रंग देना बेहद शर्मनाक कृत्य है।" - स्थानीय आक्रोश
विंटर कार्निवाल का मुख्य उद्देश्य शीतकालीन खेलों और पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। लेकिन मंच पर जिस तरह की गुटबाजी और 'क्रेडिट पॉलिटिक्स' (श्रेय लेने की राजनीति) देखी गई, उसने आयोजन की गरिमा को कम किया है।
ज्योतिर्मठ की जनता और अपमानित महसूस कर रहे जनप्रतिनिधियों के बीच इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। पर्यटन के इस उत्सव में राजनीति के प्रवेश ने एक गलत परंपरा की शुरुआत कर दी है, जिसकी चारों ओर निंदा हो रही है।


