आपदा के एक साल बाद भी मौत के मुहाने पर जगलयान तोक। मनोज रावत ने मौके पर पहुंचकर जाना ग्रामीणों का दर्द।
रुद्रप्रयाग, 9 अगस्त 2026।
सीमा पर तैनात गढ़वाल राइफल्स के जवान आशीष राणा द्वारा क्षेत्र की बदहाल स्थिति का वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाए जाने के बाद पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने सजय झिंकवान और प्रेम सिंह राणा के साथ जगलयान तोक पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। मनोज रावत ने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और खतरनाक रास्ते से गुजरकर जमीनी हालात को देखा।
मौके पर हालात बेहद चिंताजनक नजर आए। तोक तक पहुंचने वाला रास्ता एक ओर पहाड़ टूटने के खतरे से घिरा है, तो दूसरी ओर जमीन धंसने का खतरा बना हुआ है। इसी जोखिम भरे रास्ते से ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चे भी आवाजाही करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के एक साल बाद भी सड़क, रास्ते और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। आपदा में आशीष राणा के मकान की गौशाला, शौचालय और किचन का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ था, लेकिन प्रभावित परिवार आज भी समस्याओं से जूझ रहा है।
धरातल पर सरकार के दावे बेअसर?
आपदा के बाद पुनर्वास, सुरक्षा और पुनर्निर्माण को लेकर सरकार की ओर से किए जाने वाले दावों के बीच जगलयान तोक की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। एक साल का लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद अगर ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर रास्तों से गुजरना पड़े, तो आखिर आपदा राहत और पुनर्निर्माण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?**
जगलयान ही नहीं, थपोंडी सहित अन्य आपदा प्रभावित तोकों में भी तत्काल सुरक्षा इंतजाम और मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। ग्रामीणों की परेशानी के बीच सरकारी तंत्र की कथित सुस्ती अब लोगों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
वहीं, पूर्व विधायक मनोज रावत के मौके पर पहुंचने और ग्रामीणों की समस्याओं को करीब से देखने की पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से जगलयान, थपोंडी सहित आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सुरक्षा, सड़क, पेयजल और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की है।
ग्रामीणों की उम्मीद अब इसी बात पर टिकी है कि सरकारी आश्वासनों से आगे बढ़कर कब धरातल पर काम शुरू होगा।


