केदारनाथ तीर्थ पुरोहितों की ऐतिहासिक जीत: कोर्ट ने परंपरागत अधिकारों पर लगाई मुहर, अधिवक्ताओं की मजबूत पैरवी से मिली बड़ी सफलता।
उखीमठ/रुद्रप्रयाग, 26 मई।
केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में आखिरकार तीर्थ पुरोहितो को बड़ी और ऐतिहासिक जीत मिली है। ऊखीमठ सिविल न्यायालय के फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि केदारनाथ मंदिर में तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों के साथ बेरोकटोक प्रवेश कर पूजा-अर्चना, अभिषेक, संकल्प, रुद्रीपाठ तथा दान-दक्षिणा प्राप्त करने के परंपरागत और वंशानुगत अधिकार रखते हैं।
इस महत्वपूर्ण मुकदमे में तीर्थ पुरोहितों की ओर से अधिवक्ता सुशील भट्ट, हार्दिक रावत और आनंद बजवाल ने मजबूती से पक्ष रखा। अदालत में प्रभावी पैरवी, ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी तर्कों के आधार पर उन्होंने अपने मुवक्किलों के अधिकारों की जोरदार पैरवी करते हुए यह ऐतिहासिक जीत दिलाई।
न्यायालय के निर्णय के बाद केदारनाथ तीर्थ पुरोहितों में हर्ष की लहर है। सभी तीर्थ पुरोहितों ने अधिवक्ताओं सुशील भट्ट, हार्दिक रावत और आनंद बजवाल का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला केवल एक कानूनी जीत नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, धार्मिक अधिकारों और सदियों पुरानी व्यवस्था की पुनर्स्थापना है।
तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत मिसाल बनेगा और केदारनाथ धाम की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित करेगा। यह फैसला पूरे तीर्थ पुरोहित समाज के लिए सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है।



