तीर्थों में भी नहीं सुरक्षित श्रद्धालुओं का चढ़ावा?
केदारनाथ-बदरीनाथ विवाद से सरकार घिरी जांच शुरू।
BKTC ने कर्मचारियों को नोटिस जारी
उत्तराखंड के पवित्र तीर्थस्थलों Kedarnath Temple और Badrinath Temple में चढ़ावे (दान राशि) के प्रबंधन को लेकर उठे आरोपों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित सीसीटीवी वीडियो और शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
धार्मिक संगठन भैरव सेना द्वारा की गई शिकायत में दान गिनती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का दावा किया गया है। संगठन के संस्थापक संदीप खत्री का कहना है कि 2 जुलाई 2026 के सीसीटीवी फुटेज में एक कर्मचारी की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं, जिसके बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वीडियो की जांच की जा रही है और फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।
Badri-Kedar Temple Committee (BKTC) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी पर मौजूद चार कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। समिति ने 2 जुलाई की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित कर जांच प्रक्रिया में शामिल कर लिया है।
BKTC के अधिकारियों के अनुसार, फुटेज स्पष्ट नहीं है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही निकाला जाएगा।
BKTC अध्यक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति गठित किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि यदि किसी भी कर्मचारी की संलिप्तता साबित होती है, तो नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मामला तब और गंभीर हुआ जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने लगे और दानपात्र की सुरक्षा व गिनती प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। इसके बाद प्रशासन पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने दोनों धामों की व्यवस्थाओं और निगरानी प्रणाली पर व्यापक बहस जरूर छेड़ दी है।


