ऊखीमठ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई!
चुनाव आते ही वादों की बारिश, चुनाव जाते ही ऊखीमठ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर ‘ताला’! 31 अगस्त तक का अल्टीमेटम, नहीं सुधरी व्यवस्था तो 1 सितंबर से आंदोलन।
**ऊखीमठ।** पहाड़ की जनता के स्वास्थ्य से आखिर कब तक खिलवाड़ होता रहेगा? ऊखीमठ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अब क्षेत्रवासियों का सब्र टूट गया है। **चुनाव दर चुनाव स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण के वादे और घोषणाएं होती रहीं, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं।**
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकृत करने की मांग को लेकर अब क्षेत्रवासियों ने सरकार को **सीधी समय सीमा** दे दी है। नगर पंचायत अध्यक्ष, सभासदगण, व्यापार मंडल, ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधि, महिला मंगल दल और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर **31 अगस्त 2026 तक ठोस कार्रवाई की मांग की है।**
वादों से नहीं चलेगा काम, अब चाहिए जमीन पर फैसला
क्षेत्रवासियों का कहना है कि ऊखीमठ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है। **हर चुनाव में उच्चीकरण का मुद्दा गरमाया, नेताओं के मंचों से घोषणाएं हुईं, आश्वासन मिले, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मामला फिर सरकारी फाइलों में दबता चला गया।**
जनता का सवाल सीधा है—**अगर ऊखीमठ की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारना सरकार की प्राथमिकता है, तो अब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा क्यों नहीं मिला?**
पहाड़ी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र को मजबूत करने की मांग को लगातार टालना क्षेत्रवासियों के आक्रोश को और बढ़ा रहा है।
### **31 अगस्त तक फैसला नहीं तो 1 सितंबर से आंदोलन**
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि **31 अगस्त तक स्वास्थ्य सुविधाओं में आवश्यक सुधार और पीएचसी ऊखीमठ के सीएचसी के रूप में उच्चीकरण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 1 सितंबर 2026 से धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन जैसे आंदोलन शुरू किए जाएंगे।**
क्षेत्रवासियों ने साफ कर दिया है कि **अब सिर्फ आश्वासन, घोषणाओं और कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।**
### **ऊखीमठ पूछ रहा है—आखिर कब जागेगी सरकार?**
स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा के लिए जनता को आंदोलन की राह क्यों पकड़नी पड़ रही है? **क्या सरकार को पहाड़ की जनता की आवाज सुनने के लिए आंदोलन का इंतजार करना पड़ेगा?**
अब ऊखीमठ की निगाहें 31 अगस्त पर हैं। **या तो सरकार ठोस फैसला लेगी, या फिर 1 सितंबर से सड़क पर जनता और सरकार के बीच आर-पार की लड़ाई दिखाई देगी।**
क्षेत्रवासियों ने उन सभी लोगों का आभार जताया है, जिन्होंने **राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर ऊखीमठ की स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे जनहित के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई।**
ज्ञापन देने वालों में नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्मवान व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट महिला मंगल दल मंगोली मिथिला धर्मवान, महिला मंगल दल डंगवाड़ी आरती शैव सभासद प्रदीप सभासद सरला रावत पूर्व सभासद बॉबी रावत बलवंत सिंह पवन राणा कर्मवीर कुंवर आरती शैव आनंद रावत बसंती रावत,कर्मबीर कुवर ,महेश बर्त्वाल संतोष शेव यशवीर बर्तावल ,मनवर सिंह, महावीर सिंह , मिथिला धर्मवान, ममता धर्मवान, उर्मिला, दिलबर सिंह, संगीता नेगी, विमला देवी ,विमला देवी,बबीता देवी,रामेश्वरी देवी,परमिला रावत,शशि देवी,मीरा देवी आदि थे


