केशव नेगी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, पूर्व विधायक मनोज रावत ने उठाए सवाल।
देहरादून/रुद्रप्रयाग। दिल्ली के मालवीय नगर में हुई दुखद अग्निकांड की घटना में उत्तराखंड मूल के केशव नेगी की गिरफ्तारी को लेकर पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना अत्यंत दुखद है और इसमें जान गंवाने वाले सभी लोगों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं, लेकिन जांच के दौरान वास्तविक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होना भी उतना ही आवश्यक है।
मनोज रावत ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार केशव नेगी संबंधित प्रतिष्ठान में शेफ के रूप में कार्यरत थे और अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए वहां किचन में नौकरी कर रहे थे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि भवन या प्रतिष्ठान में फायर सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई, आवश्यक अनुमतियां नहीं ली गईं, अवैध निर्माण हुआ या प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती गई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी का दायित्व अपने निर्धारित कार्य का निर्वहन करना होता है, जबकि भवन की वैधता, फायर एनओसी, सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी भवन एवं प्रतिष्ठान के स्वामियों और संचालकों की होती है। इसलिए जांच एजेंसियों को सभी तथ्यों का गंभीरता से परीक्षण करना चाहिए।
पूर्व विधायक ने कहा कि न्याय का तकाजा है कि कार्रवाई वास्तविक दोषियों के खिलाफ हो। किसी ऐसे व्यक्ति को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए जो केवल अपनी आजीविका कमाने के लिए वहां कार्य कर रहा था।
मनोज रावत ने उत्तराखंड सरकार, प्रदेश के सांसदों और जनप्रतिनिधियों से भी मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केशव नेगी को उचित कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए तथा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करेंगी, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।


