सत्ता का अहंकार स्थायी नहीं, जनता सिखाएगी सबक’। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आम आदमी पार्टी का तीखा पलटवार।

सत्ता का अहंकार स्थायी नहीं, जनता सिखाएगी सबक’। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आम आदमी पार्टी का तीखा पलटवार।
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सत्ता का अहंकार स्थायी नहीं, जनता सिखाएगी सबक’।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आम आदमी पार्टी का तीखा पलटवार।




देहरादून। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष के हालिया बयान पर आम आदमी पार्टी (आप) ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश  उपाध्यक्ष सोशियल मीडिया विंग अनूप रावत ने भाजपा पर दमनकारी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कभी सफल नहीं होगा।किसी की आवाज दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ

आम आदमी पार्टी के नेता अनूप रावत ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि लोकतंत्र के भीतर किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा की आवाज को कुचलने का प्रयास करना लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विपरीत है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प को आगे बढ़ने से रोकने या उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई, तो आम आदमी पार्टी इसका लोकतांत्रिक और बेहद मजबूत तरीके से विरोध करेगी।

रावत ने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सत्ता की दमनकारी राजनीति से बिल्कुल भी डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, "भाजपा का संगठन भले ही बड़ा और संसाधनों से संपन्न हो, लेकिन आम आदमी पार्टी के पास जनता के मुद्दों के लिए जुनून, जोश और संघर्ष का जज़्बा है।" 

पार्टी राज्य की जनता की आवाज को लगातार उठाती रहेगी और जनहित के मुद्दों पर सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।

भाजपा नेतृत्व को नसीहत देते हुए अनूप रावत ने कहा कि सत्ता का अहंकार कभी भी स्थायी नहीं रहता। लोकतंत्र में सबसे बड़ी और असली ताकत जनता के हाथ में होती है। जिस जनता ने किसी दल को आज सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया है, वही जनता समय आने पर बदलाव का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

 यदि जनता के वास्तविक मुद्दों को प्रभावी ढंग से उनके सामने रखा जाए, तो राजनीतिक परिस्थितियां बदलने में बिल्कुल भी समय नहीं लगता।

'आप' नेता ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय हमेशा जनता का ही होता है। जनता ही यह तय करती है कि किसे सत्ता की कुर्सी पर बैठाना है और किसे विपक्ष की भूमिका सौंपनी है। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल को लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा से घबराने के बजाय जनता के बीच अपने काम और नीतियों के आधार पर जाना चाहिए, न कि विरोधियों की आवाज दबाने का प्रयास करना चाहिए।

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