एक साल बाद भी पुल नहीं बना, जेसीबी की बकेट में नदी पार कर रहे ग्रामीण और बच्चे! यमुनोत्री में सरकारी दावों की खुली पोल।
नौगांव। यमुनोत्री क्षेत्र के नौगांव ब्लॉक में कुपड़ा-कुंशाला-त्रिखीली मोटर मार्ग पर सरकारी लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। करीब एक साल पहले आपदा में बह गया गड़गाड़ का पुल आज तक तैयार नहीं हो सका है। निर्माणाधीन वेली ब्रिज अधूरा पड़ा है और अब ग्रामीणों के लिए जेसीबी की बकेट ही नदी पार करने का सहारा बन गई है।
सबसे चिंताजनक तस्वीर यह है कि ग्रामीणों के साथ बच्चे भी जेसीबी की बकेट में बैठकर नदी पार करने को मजबूर हैं। जेसीबी ऑपरेटर एक-एक कर लोगों और बच्चों को बकेट में बैठाकर गदेरा पार करा रहा है। बरसात के बीच इस तरह की आवाजाही कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
एक साल में पुल नहीं बना, आखिर सरकार कर क्या रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के बाद पुल निर्माण के आश्वासन दिए गए थे, लेकिन एक साल गुजरने के बावजूद वेली ब्रिज पूरा नहीं हो पाया। सवाल यह है कि जब ग्रामीण एवं बच्चों तक को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं कराया जा सका तो आपदा के बाद किए गए पुनर्निर्माण के दावे किस हद तक जमीन पर उतरे?
बरसात में नदी और गदेरों का जलस्तर बढ़ने के बावजूद लोगों को जेसीबी की बकेट के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि वेली ब्रिज का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए और तब तक बच्चों व ग्रामीणों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था की जाए।
एक साल से पुल अधूरा है, नदी के ऊपर जिंदगी जोखिम में है और जेसीबी की बकेट में बच्चों की तस्वीर सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब ग्रामीण पूछ रहे हैं—आखिर सुरक्षित पुल के लिए उन्हें और कितना इंतजार करना पड़ेगा?


