बारिश में सड़क मरम्मत या सरकारी धन की बर्बादी? रुद्रप्रयाग में ‘टल्ले’ लगते ही उखड़ने लगे।

बारिश में सड़क मरम्मत या सरकारी धन की बर्बादी? रुद्रप्रयाग में ‘टल्ले’ लगते ही उखड़ने लगे।
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बारिश में सड़क मरम्मत या सरकारी धन की बर्बादी? रुद्रप्रयाग में ‘टल्ले’ लगते ही उखड़ने लगे।



जिला अस्पताल के पास कुछ दिन पहले भरे गड्ढे फिर उखड़े, उसी स्थान पर दोबारा पैचवर्क शुरू; एनएच विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

**रुद्रप्रयाग।** बरसात के मौसम में सड़कें बदहाल हैं और गड्ढे राहगीरों व वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। ऐसे में सड़कों की मरम्मत कर राहत देने के बजाय यदि मरम्मत के नाम पर कुछ ही दिनों में उखड़ जाने वाले ‘टल्ले’ लगाए जाएं तो सवाल उठना लाजिमी है। रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय में राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की ओर से कराए जा रहे पैचवर्क को लेकर अब स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़क के गड्ढों को भरने और मरम्मत के लिए पैचवर्क कराया जा रहा है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश और नमी के बीच किए जा रहे इस काम की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।** कई स्थानों पर सड़क पर लगाए गए ‘टल्ले’ ज्यादा समय तक टिक नहीं पा रहे हैं और वाहनों की आवाजाही के साथ ही उखड़ने लगे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि पैचवर्क के लिए सड़क की सतह और मौसम की परिस्थितियों का उचित ध्यान नहीं रखा गया तो मरम्मत पर खर्च होने वाला सरकारी पैसा कितने दिन टिकेगा, यह बड़ा सवाल है। सड़क ठीक होने के बजाय कुछ दिनों बाद फिर गड्ढों में तब्दील हो जाए तो आखिर इस मरम्मत का फायदा किसे मिल रहा है?

 जिला अस्पताल के पास फिर उखड़े ‘टल्ले’

सबसे बड़ा सवाल जिला अस्पताल के समीप कराए गए पैचवर्क को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ दिन पहले यहां सड़क के गड्ढों को भरने के लिए पैचवर्क किया गया था, लेकिन बारिश के बाद ‘टल्ले’ उखड़ गए।

अब उसी स्थान पर विभाग की ओर से दोबारा पैचवर्क कराया जा रहा है। ऐसे में जनता का सीधा सवाल है कि जब पहले किया गया काम कुछ ही दिनों में टिक नहीं पाया तो दोबारा किया जा रहा पैचवर्क कितने दिन तक चलेगा?

यदि पहली मरम्मत की गुणवत्ता खराब थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय हुई? और यदि काम मानकों के अनुरूप था तो इतनी जल्दी सड़क दोबारा खराब कैसे हो गई? इन सवालों का जवाब विभाग को देना होगा।

 सड़क मरम्मत या महज खानापूर्ति?

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान सड़कों पर गड्ढे बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क मरम्मत का काम सिर्फ गड्ढों में सामग्री डालकर खानापूर्ति करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मरम्मत ऐसी हो जो लंबे समय तक टिक सके।**

लोगों का आरोप है कि यदि हर बारिश के बाद वही गड्ढे दोबारा खुल जाते हैं और विभाग को बार-बार उसी स्थान पर पैसा खर्च करना पड़ता है तो यह सरकारी धन के इस्तेमाल की गंभीर समीक्षा का विषय है।

## गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

स्थानीय लोगों ने सड़क मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित कार्यदायी संस्था द्वारा किए जा रहे पैचवर्क की तकनीकी जांच होनी चाहिए और यदि कहीं मानकों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोगों का यह भी सवाल है कि क्या बारिश के बीच इस तरह का पैचवर्क तकनीकी रूप से उचित है? यदि नहीं, तो फिर जनता के सामने इसकी वजह स्पष्ट की जानी चाहिए।

## सरकारी धन खर्च, सड़क फिर बदहाल!

रुद्रप्रयाग जैसे पहाड़ी शहर में सड़क की गुणवत्ता सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ी है। यहां सड़क पर छोटी सी लापरवाही भी वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में मरम्मत के नाम पर ऐसा काम जो कुछ दिनों में ही जवाब दे जाए, उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जनता अब सिर्फ सड़क पर ‘टल्ले’ नहीं, स्थायी और गुणवत्तापूर्ण समाधान चाहती है। सवाल यह है कि विभाग इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करेगा या फिर हर बरसात में गड्ढे भरने और उनके दोबारा उखड़ने का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

अगर सड़क मरम्मत के नाम पर पैसा खर्च होने के बाद भी सड़क कुछ ही दिनों में फिर बदहाल हो जाए, तो यह सिर्फ सड़क की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल है।

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