बेलनी पुल के पुनर्निर्माण पर भड़का जनाक्रोश, व्यापारियों ने लगाए ‘बेलनी पुल कैंसल करो’ के नारे।
रुद्रप्रयाग। बेलनी पुल के प्रस्तावित पुनर्निर्माण को लेकर रुद्रप्रयाग में स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। पुल के पुनर्निर्माण के विरोध में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा बेलनी पुल उपयोग में है, ऐसे में इसे तोड़कर दोबारा बनाने का प्रस्ताव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार बेलनी पुल रुद्रप्रयाग के सबसे पुराने पुलों में शामिल है और वर्तमान में इसका उपयोग लगातार किया जा रहा है। उनका कहना है कि अलकनंदा नदी पर बेलनी पुल से करीब 200 मीटर के दायरे में ही एक नए पुल और सुरंग के माध्यम से बद्रीनाथ राजमार्ग को जोड़ने वाली परियोजना प्रस्तावित है। ऐसे में पुराने पुल को तोड़कर उसके स्थान पर नया पुल बनाने की जरूरत पर लोगों ने सवाल खड़े किए हैं।
बेलनी सभासद सुरेंद्र रावत ने कहा कि नए पुल के निर्माण से चारधाम यात्रा को बेहतर गति मिल सकती है और क्षेत्रवासियों को सुविधाएं भी मिलेंगी, लेकिन इसके लिए पुराने बेलनी पुल को तोड़ना स्थानीय लोगों के हित में नहीं है।उनका कहना है कि विकास कार्य ऐसा होना चाहिए, जिससे क्षेत्र की जनता को सुविधा मिले और स्थानीय लोगों के रोजगार पर संकट न आए।
28 दुकानदारों के रोजगार पर संकट का दावा
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि बेलनी पुल के पुनर्निर्माण की स्थिति में करीब 28 दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होगा। इसके साथ ही लगभग 10 मकान मालिकों की आजीविका पर भी संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुल निर्माण के नाम पर यदि दुकानें और मकान प्रभावित होते हैं तो कई परिवारों के सामने रोजगार और आवास दोनों का संकट पैदा हो जाएगा।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बेलनी पुल के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पहले भी दो बार सामने आ चुका है, लेकिन दोनों बार जनता ने इसका विरोध किया था। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि जब वर्तमान पुल उपयोग में है और लोगों की आवाजाही इसी के माध्यम से हो रही है, तो उसके पुनर्निर्माण की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ रही है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन से बेलनी पुल के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव निरस्त करने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी कार्यालय में धरना-प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी गई।
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर बेलनी पुल कैंसल करो”, “रोजगार बचाओ, बेलनी पुल बचाओ” और “जनता के हित में फैसला लो” जैसे नारे लगाए।
अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर क्या निर्णय लेते हैं और प्रस्तावित परियोजना में रोजगार व स्थानीय हितों को किस तरह सुरक्षित किया जाता है।


