पीपलकोटी टनल हादसे पर उबाल! सरकार और परियोजना प्रबंधन के खिलाफ श्रमिकों का मोर्चा।
मौत के बाद मुआवजे पर भी खींचतान? श्रमिकों ने काम ठप कर शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना—अब जवाब मांग रहा मजदूर।
पीपलकोटी, चमोली। विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना की टनल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब श्रमिकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। मौत और गंभीर चोटों के बाद न्यायसंगत मुआवजे की मांग को लेकर हिंदुस्तान फेडरेशन यूनियन के आह्वान पर श्रमिकों ने परियोजना स्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने परियोजना के समस्त कार्यों का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
सवाल सीधा है—जान की कीमत आखिर कितनी?
टनल हादसे में श्रमिकों की मौत और कई के घायल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि मृतकों के परिवारों और घायलों को न्यायसंगत मुआवजा कब और कितना मिलेगा?
श्रमिकों का कहना है कि हादसे का दर्द सिर्फ घटना के दिन तक सीमित नहीं रहता। किसी परिवार ने अपना कमाने वाला खोया है तो कोई घायल होकर भविष्य की चिंता से जूझ रहा है। ऐसे में मुआवजे और अधिकारों को लेकर स्पष्ट और न्यायसंगत निर्णय की मांग तेज हो गई है।
सरकार से सवाल—हादसे के बाद जवाबदेही कौन तय करेगा?
श्रमिकों के आंदोलन ने सरकार और परियोजना प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या परियोजना में श्रमिक सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त थे?
हादसे की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची?
मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए मुआवजे का स्पष्ट पैकेज क्या है?
और अगर श्रमिकों को न्यायसंगत मुआवजे के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है, तो उनकी शिकायतें पहले क्यों नहीं सुनी गईं?**
इन सवालों के जवाब अब श्रमिक ही नहीं, बल्कि हादसे के बाद चिंतित स्थानीय लोग भी मांग रहे हैं।
काम बंद कर श्रमिकों का दो टूक संदेश
विरोध प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया कि **मांगों पर ठोस समाधान के बिना परियोजना के कार्यों में सहयोग नहीं किया जाएगा।** समस्त कार्यों का बहिष्कार कर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना अब परियोजना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
हादसे के बाद सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों के बीच श्रमिकों का यह आंदोलन सरकार और परियोजना प्रबंधन पर दबाव बढ़ा रहा है।
अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए!
पीपलकोटी का यह आंदोलन सिर्फ मुआवजे की मांग तक सीमित नहीं दिख रहा। यह उस व्यवस्था से जवाब मांग रहा है जिसमें परियोजनाओं की रफ्तार के बीच काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और उनके परिवारों के भविष्य को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।*
श्रमिकों का आंदोलन जारी है और अब नजर इस बात पर है कि सरकार और परियोजना प्रबंधन उनकी मांगों पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।


