राज्य वित्त में कटौती और DPC गठन पर सरकार घिरी, जिला पंचायत सदस्यों का फूटा गुस्सा.।
गांवों के विकास का पैसा रोका तो सड़कों पर उतरेंगे” — जिला पंचायत संगठन ने दी राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
रुद्रप्रयाग। राज्य वित्त से जिला पंचायतों को मिलने वाली धनराशि में कटौती और लंबे समय से जिला योजना समिति (DPC) का गठन नहीं होने को लेकर जिला पंचायत सदस्यों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। जिला पंचायत संगठन के प्रदेश महामंत्री अजयबीर सिंह भंडारी, जिला पंचायत सदस्य पवन कुमार और किरन नौटियाल ने प्रेस के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंचायतों को मजबूत करने के दावों के बीच जमीनी स्तर पर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है।
जिला पंचायत सदस्यों का आरोप है कि राज्य वित्त में कटौती का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। जिला पंचायतें गांवों की मूलभूत जरूरतों—सड़क, रास्ते, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्यों—के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में बजट में कटौती से विकास योजनाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है।
DPC गठन नहीं, तो फिर जिला स्तर की योजनाएं कैसे तय होंगी?
जिला पंचायत सदस्यों ने जिला योजना समिति (DPC) का गठन नहीं होने को भी गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना है कि जिला स्तर पर विकास योजनाओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन DPC का गठन नहीं होने से पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका और अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब सरकार गांवों को विकास की पहली इकाई बताती है, तो फिर उन्हीं गांवों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को निर्णय प्रक्रिया से दूर क्यों रखा जा रहा है?
घोषणाओं से नहीं, बजट और अधिकारों से मजबूत होती हैं पंचायतें।
जिला पंचायत संगठन के प्रदेश महामंत्री अजयबीर सिंह भंडारी ने कहा कि पंचायतों को केवल घोषणाओं और कागजी दावों से मजबूत नहीं किया जा सकता। इसके लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन, स्पष्ट अधिकार और समयबद्ध तरीके से संस्थागत व्यवस्थाओं का संचालन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य वित्त में कटौती और DPC गठन में देरी से जिला पंचायतों के साथ-साथ ग्रामीण जनता भी प्रभावित हो रही है। यदि सरकार ने जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की और पंचायतों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो संगठन आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए मजबूर होगा।
सरकार को चेतावनी—मांगें नहीं मानी तो प्रदेशभर में आंदोलन
जिला पंचायत सदस्यों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि राज्य वित्त में पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने, जिला योजना समिति का गठन करने और पंचायतों के अधिकार एवं वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करने की दिशा में जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जिला पंचायत संगठन राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
रुद्रप्रयाग से उठी यह आवाज अब केवल स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का मुद्दा नहीं रह गई है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इसका सीधा संबंध प्रदेश के हजारों गांवों के विकास से है। ऐसे में अब निगाहें सरकार पर हैं कि वह पंचायत प्रतिनिधियों की नाराजगी को कितनी गंभीरता से लेती है और बजट तथा DPC को लेकर क्या ठोस फैसला करती है।
बड़ा सवाल यह है कि जब गांवों के विकास की जिम्मेदारी पंचायतों के कंधों पर है, तो उन्हें पर्याप्त वित्तीय ताकत और निर्णय लेने का अधिकार देने में सरकार पीछे क्यों हट रही है?


