कणसिली-जाबरी-कान्दी-बाडव-मोहनखाल सड़क पर सियासी संग्राम!
पूर्व विधायक मनोज रावत का सरकार और विधायक पर हमला।
सड़क कहीं है ही नहीं, घोषणाओं और GO से नहीं चलेगा काम।
**रुद्रप्रयाग।** केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की कणसिली-जाबरी-कान्दी-बाडव-मोहनखाल सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व विधायक मनोज रावत ने सड़क की दुर्दशा को लेकर प्रदेश सरकार, स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों को सीधे निशाने पर लेते हुए जवाब मांगा है कि आखिर सड़क के सुधारीकरण के लिए सरकार ने किस योजना में, किस वित्तीय वर्ष में और कितना बजट स्वीकृत किया है।
मनोज रावत का कहना है कि वह तीन दिन पहले इस सड़क से होकर गए और मौके की स्थिति देखकर हैरान रह गए। उनके मुताबिक सड़क की हालत इतनी खराब है कि **“सड़क कहीं है ही नहीं।”** उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क पर लोगों ने कमर्शियल वाहन तक खड़े कर दिए हैं और क्षेत्र के युवा अब सोशल मीडिया के माध्यम से सड़क की बदहाली के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।
महिलाएं विधायक का इंतजार करती रहीं, लेकिन नहीं पहुंचीं।
पूर्व विधायक ने कहा कि वह कल नीलेश्वर महादेव, बांदरी गांव में आयोजित अखंड रामायण कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहां मौजूद महिलाओं ने सड़क और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। रावत के अनुसार महिलाओं का कहना था कि इस बार वोट नहीं देंगे।
मनोज रावत ने कहा कि महिलाएं विधायक का इंतजार कर रही थीं। उनका कहना है कि यदि विधायक वहां पहुंचतीं तो ग्रामीण महिलाएं अपने देहाती अंदाज में उन्हें अपनी समस्याएं और जनआक्रोश सीधे बता सकती थीं।
उपचुनाव में घर-घर रोटी, अब गांवों की सुध कौन लेगा?
पूर्व विधायक ने केदारनाथ उपचुनाव का हवाला देते हुए सरकार और सत्ताधारी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान इन गांवों में मंत्रियों और विधायकों का डेरा पड़ा था। नेता घर-घर पहुंच रहे थे, लोगों के साथ खाना खा रहे थे और रिश्तेदारियां तक निकाली जा रही थीं। उनके मुताबिक उस दौरान अधिकारी भी गांव-गांव और गली-गली घूम रहे थे।
रावत का सवाल है कि चुनाव खत्म होने के बाद वही गांव और वही सड़कें सरकार की प्राथमिकता से बाहर क्यों हो गईं?
फर्जी घोषणाओं और GO से अब काम नहीं चलेगा
मनोज रावत ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से सड़क को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाएं करने या शासनादेश जारी करने से काम नहीं चलेगा। सरकार को सार्वजनिक रूप से बताना होगा कि—
रावत ने कहा कि यदि सरकार और जनप्रतिनिधि इन सवालों का जवाब नहीं देते हैं तो वह स्वयं उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और आंकड़ों के आधार पर यह सामने रखेंगे कि सड़क के नाम पर वास्तव में कितना काम और कितना धन हुआ है।
सड़क पर सवाल, सरकार की नीयत पर निशाना
कणसिली से मोहनखाल तक सड़क की बदहाली अब महज ग्रामीण समस्या नहीं, बल्कि सियासी मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक के हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल स्थानीय विधायक और सरकार के सामने यही है कि जिस क्षेत्र में चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं की गईं, वहां आज ग्रामीणों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है?
अब गेंद सरकार और स्थानीय विधायक के पाले में है—क्या सड़क के लिए बजट और समयसीमा का स्पष्ट हिसाब जनता के सामने रखा जाएगा, या फिर एक बार फिर घोषणाओं के सहारे मामला टाल दिया जाएगा?


