चमोली में स्वास्थ्य सिस्टम वेंटिलेटर पर।

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चमोली में स्वास्थ्य सिस्टम वेंटिलेटर पर।

थराली में 6 घंटे तक तड़पती रही गर्भवती।

रेफर में देरी से एंबुलेंस में तोड़ा दम, परिजनों का फूटा गुस्सा।


गोपेश्वर/थराली। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं थामे नहीं थम रही हैं। चमोली जिले के थराली से एक बेहद दर्दनाक और सरकारी दावों की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है। यहां प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक 32 वर्षीय गर्भवती महिला की इलाज में लापरवाही और समय पर रेफर न किए जाने के कारण मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार के 'सुरक्षित प्रसव' के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

6 घंटे तक सामान्य प्रसव का झांसा, ऐन वक्त पर किया रेफर।

परिजनों का गंभीर आरोप है कि महिला को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) थराली लाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ ने करीब छह घंटे तक महिला को यह कहकर भर्ती रखा कि प्रसव सामान्य (नॉर्मल डिलीवरी) होगा। इस दौरान महिला दर्द से तड़पती रही, लेकिन जिम्मेदार सुध लेने को तैयार नहीं हुए। जब महिला की स्थिति बेहद नाजुक हो गई और मामला हाथ से निकलने लगा, तब आनन-फानन में उसे कर्णप्रयाग के लिए रेफर कर दिया गया। 

एंबुलेंस में ही थम गईं सांसें, अनाथ हुए दो मासूम।

अस्पताल प्रशासन की इस कदर लापरवाही रही कि सही समय पर इलाज या रेफरल न मिलने के कारण महिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही 108 एंबुलेंस में दम तोड़ चुकी थी। मृतका के दो छोटे बच्चे हैं और यह उसका तीसरा प्रसव था। इस घटना के बाद से परिजनों में सरकार और स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। परिजनों का साफ कहना है कि अगर समय रहते रेफर कर दिया जाता, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

सरकारी दावों पर गंभीर सवाल।

पहाड़ में 'डबल इंजन' सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और हर गांव तक एंबुलेंस व डॉक्टरों की उपलब्धता का ढिंढोरा पीटती है। लेकिन धरातल पर थराली जैसी घटनाएं बयां करती हैं कि आज भी गर्भवती महिलाएं इलाज के अभाव में दम तोड़ रही हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया है और आधिकारिक जांच का इंतजार किया जा रहा है। स्थानीय जनता अब लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों पर सख्त कार्रवाई और सरकार से जवाब मांग रही है। 

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