भ्रष्टाचार और तानाशाही का अड्डा बना उत्तराखंड वन विकास निगम।
करोड़ों की बर्बादी और घोटालों का आरोप।
कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा।
देहरादून। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों के बीच एक और बड़े घोटाले की सुगबुगाहट तेज हो गई है। उत्तराखंड वन विकास निगम में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, फिजूलखर्ची और कर्मचारियों के शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष त्रिलोक सिंह बिष्ट ने एक प्रेसवार्ता के दौरान निगम प्रबंधन की कार्यप्रणाली की पोल खोलते हुए सरकार और प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अनावश्यक आयोजनों में करोड़ों की बर्बादी, कर्मचारियों को फूटी कौड़ी नहीं।
कर्मचारी संघ के अध्यक्ष त्रिलोक सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि निगम प्रबंधन पूरी तरह तानाशाही पर उतारू है और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है। एक तरफ जहां निगम के पास अपने रिटायर्ड और अतिथि कर्मचारियों को सालों से बकाया देयक (भुगतान) देने के लिए बजट नहीं है, वहीं दूसरी तरफ अनावश्यक योजनाओं और तामझाम वाले आयोजनों के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।
डिपो संचालन और श्रमिक सुरक्षा के नाम पर 'बड़ा खेल'।
प्रेसवार्ता में डिपो संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिकीकरण के नाम पर हो रहे खर्चों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। आरोप है कि आधुनिकीकरण के नाम पर कागजों में भारी-भरकम बजट ठिकाने लगाया जा रहा है, जबकि धरातल पर न तो डिपो की सुरक्षा सुधरी है और न ही डिपो श्रमिकों को उनका हक मिल रहा है। प्रबंधन की इस मनमानी के चलते कर्मचारियों में सरकार और निगम के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
कर्मचारी संघ की तीन प्रमुख मांगें, आर-पार की लड़ाई का ऐलान।
निगम के इस कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोलते हुए सरकार के सामने तीन बड़ी मांगें रखी हैं।
1-लेवल-4 प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी: कर्मचारियों के हित से जुड़े लेवल-4 के प्रस्ताव को प्रबंधन बिना किसी देरी के तुरंत लागू करे।
2-2014 के बाद वालों को पेंशन का लाभ: साल 2014 के बाद नियुक्त हुए सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना की तर्ज पर सुरक्षा और लाभ दिया जाए।
3-लंबित भुगतान का तत्काल निपटारा: सालों से विभागों के चक्कर काट रहे सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) कर्मचारियों का पूरा बकाया फंड तुरंत जारी हो।सरकारी दावों पर बड़ा सवालजीरो टॉलरेंस और सुशासन की बात करने वाली सरकार की नाक के नीचे वन विकास निगम में चल रहा यह 'खेल' कई सवाल खड़े करता है। त्रिलोक सिंह बिष्ट की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है। देखना होगा कि क्या सरकार इस करोड़ों के कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करेगी, या फिर हमेशा की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।


