रामगढ़ में अडानी की खदानों के खिलाफ जुटी हजारों की भीड़।

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रामगढ़ में अडानी की खदानों के खिलाफ जुटी हजारों की भीड़।

टीएस सिंहदेव बोले- 'लक्ष्मण रेखा मिटाकर रावण को घुसाया गया।


अंबिकापुर। रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र और राज्य सरकार पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कार्यक्रम में हजारों ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

सभा को संबोधित करते हुए सिंहदेव ने कहा कि हसदेव और उदयपुर क्षेत्र में पहले जहां सीमित खनन की अनुमति थी, वहीं अब बड़ी संख्या में नई कोयला खदानों को मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद खनन विस्तार के रास्ते खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा, "रावण को घर में घुसाने के लिए लक्ष्मण रेखा ही मिटा दी गई।" सिंहदेव ने दावा किया कि रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों का अस्तित्व खनन परियोजनाओं से खतरे में पड़ गया है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार रामगढ़ में नया भव्य मंदिर बनाने की बात कर रही है तो यह भी संकेत है कि क्षेत्र में भूगर्भीय खतरे और चट्टानों में दरारों की समस्या मौजूद है। उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ में चल रहे जनआंदोलनों को एकजुट करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी समाज सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। बैज ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े उद्योगपतियों के हित में कार्य कर रही है और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए व्यापक जनसंघर्ष की आवश्यकता है।

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि देश में प्राकृतिक संसाधनों पर कॉरपोरेट नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की जा रही है और इसके खिलाफ जनता को एकजुट होना होगा।

सर्व आदिवासी समाज के नेता विनोद नागवंशी ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्रों के स्थानीय लोग आज भी बेरोजगारी और विस्थापन की समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत ने इसे पूरे छत्तीसगढ़ के अस्तित्व की लड़ाई बताया।

हसदेव बचाव मंच के संयोजक आलोक शुक्ला ने दावा किया कि केते एक्सटेंशन परियोजना के तहत लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में करीब 7 लाख पेड़ों की कटाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि आगे अन्य कोल ब्लॉकों में भी बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका है।

परिचर्चा में रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। ग्रामीणों ने क्षेत्र में हो रहे हवाई सर्वेक्षणों पर चिंता जताते हुए आशंका व्यक्त की कि भविष्य में नए खनन प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में सरगुजा संभाग समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 5 से 6 हजार लोग रामगढ़ और हसदेव क्षेत्र के संरक्षण की मांग को लेकर शामिल हुए।

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