सलाम है इस जज्बे को! चमोली में भारी बारिश से बंद हुआ रास्ता।

सलाम है इस जज्बे को! चमोली में भारी बारिश से बंद हुआ रास्ता।
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सलाम है इस जज्बे को! चमोली में भारी बारिश से बंद हुआ रास्ता।

 तो देवदूत बनकर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम।

 10 किमी पैदल चलकर रास्ते में ही कराया सुरक्षित प्रसव।


चमोली/थराली: चमोली जनपद से स्वास्थ्य विभाग के समर्पण और मुस्तैदी की एक ऐसी दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है, जिसने पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों के बीच 'देवदूतों' के अस्तित्व को एक बार फिर सच साबित कर दिया है। Uttarakhand Live के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जब मुख्य मोटर मार्ग मलबे से बंद हो गया और एक गर्भवती महिला तड़पती रह गई, तब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। टीम ने रात के अंधेरे और आपदा जैसे माहौल में 10 किलोमीटर की बेहद कठिन और खतरनाक पैदल दूरी तय की और रास्ते में ही महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। चिकित्सकों के मुताबिक, जच्चा (मां) और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। 


मिली जानकारी के अनुसार, थराली ब्लॉक के ग्राम गोठिंडा निवासी पुष्पा देवी (पत्नी दिनेश सिंह) को रात करीब 2 बजे अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। घबराए परिजन उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) थराली ले जाने के लिए निकले। मगर पहाड़ों में हो रही मूसलाधार बारिश आफत बनकर सामने खड़ी थी; लैंडस्लाइड के कारण मोटर मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका था और अस्पताल पहुंचना नामुमकिन हो गया था।

परिस्थिति बिगड़ती देख परिजनों ने इसकी सूचना ब्लॉक आशा समन्वयक प्रवेन्द्र सिंह को दी, जिन्होंने बिना वक्त गंवाए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय गुप्ता को मामले से अवगत कराया। आपदा के इस दौर में डॉक्टरों की टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला। आवश्यक जीवन रक्षक चिकित्सा सामग्री और डिलीवरी किट के साथ स्वास्थ्यकर्मी रात में ही मौके के लिए रवाना हो गए। थराली से गांव तक का रास्ता बंद होने के कारण टीम ने करीब 10 किलोमीटर का डरावना और पथरीला सफर पैदल ही तय किया और तड़पती हुई गर्भवती महिला तक पहुंचे।

अस्पताल ले जाने का समय न होने के कारण स्वास्थ्य टीम ने सूझबूझ दिखाई और मौके की संवेदनशीलता को देखते हुए रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराने का फैसला लिया। बेहद विषम परिस्थितियों के बीच टीम के अथक प्रयासों से पुष्पा देवी ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। इस सफल और सुरक्षित प्रसव के बाद परिजनों की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम के इस त्वरित प्रयास व समर्पण के लिए हाथ जोड़कर उनका आभार व्यक्त किया।

इस जांबाज रेस्क्यू और प्रसव टीम में राहुल देवराड़ी (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी - CHO),मंजू बिष्ट (ANM),मीना देवी (स्थानीय आशा कार्यकर्ता) शामिल थे।

मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. अभिषेक गुप्ता ने बताया कि प्रसूता और नवजात शिशु दोनों की लगातार स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। 

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