7 करोड़ की PMGSY सड़क पर सवाल।
पूर्व विधायक मनोज रावत के कार्यकाल में मिली स्वीकृति।
डेढ़ साल बाद भी बदहाल सल्या–तुलंगा और त्रियुगीनारायण मार्ग।
रुद्रप्रयाग। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत सल्या–तुलंगा और त्रियुगीनारायण सड़क के सुधारीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब 7 करोड़ रुपये की इस योजना का कार्य न केवल निर्धारित समय सीमा से पीछे चल रहा है, बल्कि सड़क की मौजूदा स्थिति देखकर गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इन सड़कों के सुधारीकरण की स्वीकृति पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत के कार्यकाल के अंतिम दिनों में मिली थी। निर्माण कार्य वर्ष 2024 में शुरू हुआ और इसे जनवरी 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक कार्य अधूरा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत ऐसी है कि इसे सुधारीकरण नहीं, बल्कि "बिगाड़ीकरण" कहना ज्यादा उचित होगा।
सल्या में आयोजित एक बैठक के दौरान पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कार्य शुरू 2024 में हुआ और खत्म जनवरी 2025 में हो जाना चाहिए था। अभी तक कुछ हुआ नहीं दिख रहा है।
उन्होंने सड़क निर्माण की धीमी गति और गुणवत्ता पर खुलकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की स्थिति लगातार खराब बनी हुई है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्वीकृत और वित्तपोषित परियोजनाओं की यह स्थिति है, तो जिन सड़कों को अभी तक बजट भी नहीं मिला है, उनकी हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
लोगों ने लोक निर्माण एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ ही जिले के प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी और स्थानीय विधायक आशा नौटियाल से भी मौके का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इससे पहले इसी सड़क को विश्व बैंक परियोजना के दौरान भी अपेक्षित गुणवत्ता नहीं मिल सकी थी। अब PMGSY के तहत चल रहे सुधारीकरण कार्य पर भी सवाल उठने लगे हैं, जिससे लोगों का सरकारी निर्माण कार्यों पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है।




