बदरी-केदार मंदिर समिति में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक धांधली, अध्यक्ष के 'पीए' प्रमोद नौटियाल सस्पेंड।

बदरी-केदार मंदिर समिति में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक धांधली, अध्यक्ष के 'पीए' प्रमोद नौटियाल सस्पेंड।
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बदरी-केदार मंदिर समिति में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक धांधली, अध्यक्ष के 'पीए' प्रमोद नौटियाल सस्पेंड।


देहरादून / चमोली:उत्तराखंड के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक आस्था के केंद्र श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के भीतर चल रहा अंदरूनी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता अब खुलकर सामने आ गई है। व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और अनुशासन के बड़े-बड़े दावे करने वाली मंदिर समिति के शीर्ष स्तर पर गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। समिति ने आनन-फानन में अध्यक्ष कार्यालय में तैनात उनके व्यक्तिगत सहायक (PA) प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। प्रमोद नौटियाल पर प्रथम दृष्टया बेहद संगीन प्रशासनिक अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे मंदिर समिति की साख पर गहरा बट्टा लगा है।

 आस्था के केंद्र में अपनों की ही 'सेंधमारी'लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस वीआईपी संस्था के अध्यक्ष कार्यालय से ही भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों के तार जुड़ना बेहद चिंताजनक और नकारात्मक माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो यह अनियमितताएं लंबे समय से चल रही थीं, जिस पर प्रशासन पर्दा डाले बैठा था। अब जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तब जाकर यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है। इस बड़ी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि मंदिर के आंतरिक प्रशासन में अनुशासन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।

मामले के तूल पकड़ने और चौतरफा बदनामी के डर से घबराए मंदिर समिति प्रशासन ने आनन-फानन में एक चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। हालांकि, स्थानीय जानकारों और आलोचकों का मानना है कि ऐसी समितियां अक्सर बड़े मगरमच्छों को बचाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए बनाई जाती हैं।

  अध्यक्ष के सबसे करीबी और भरोसेमंद पीए पर ही गंभीर वित्तीय या प्रशासनिक हेरफेर के आरोप लगे हैं, जो सीधे तौर पर टॉप मैनेजमेंट की नाकामी को दर्शाता है।

 मंदिर समिति में अंदरखाने क्या खिचड़ी पक रही है, इसकी जानकारी तब तक बाहर नहीं आती जब तक कि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए।

 इस निलंबन के बाद चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन और मंदिर के वीआईपी मैनेजमेंट की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।समिति ने हालांकि दावा किया है कि जांच पूरी होने तक प्रशासनिक निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने बीकेटीसी (BKTC) के आंतरिक कामकाज की पोल खोलकर रख दी है।

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