चोपता का सरकारी स्कूल बना खतरा! बारिश में भरभराकर टूटा लेंटर, 32 बच्चों की पढ़ाई धर्मशाला में—शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी।
जर्जर विद्यालय की पहले भी दी गई थी सूचना, कार्रवाई के इंतजार में बिगड़ी हालत; बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में आक्रोश।
**नारायणबगड़/चमोली।** सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था का एक और मामला नारायणबगड़ विकासखंड के चोपता से सामने आया है। यहां **राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय चोपता** की जर्जर इमारत भारी बारिश का दबाव नहीं झेल सकी और विद्यालय का लेंटर क्षतिग्रस्त हो गया। कमरों में पानी भरने के बाद अब विद्यालय में पढ़ने वाले **32 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित** हो गई है।
अभिभावकों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी चमोली को ज्ञापन दे कर आरोप लगाया है कि विद्यालय भवन लंबे समय से जर्जर हालत में था और इसकी सूचना विभाग को पहले भी लिखित रूप में दी जा चुकी थी। इसके बावजूद समय रहते भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
पत्र ,(ज्ञापन)के अनुसार 16 और 17 अगस्त 2026 को हुई अत्यधिक बारिश के दौरान विद्यालय का लेंटर टूट गया**, जबकि कमरों में जलभराव भी हो गया। इससे विद्यालय भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना जोखिम भरा हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें लगातार इस बात का डर बना हुआ है कि कहीं विद्यालय की छत का कोई और हिस्सा बच्चों के लिए खतरा न बन जाए।
सरकारी स्कूल में पढ़ाई के लिए धर्मशाला का सहारा
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल विद्यालय का संचालन मंदिर समिति की धर्मशाला में किया जा रहा है। पत्र के मुताबिक यह व्यवस्था 30 सितंबर 2026 तक ही उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इसके बाद 32 बच्चों की पढ़ाई कहां और किस व्यवस्था के तहत होगी?
अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से विद्यालय भवन का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बच्चों की सुरक्षा के साथ उनके भविष्य से भी खिलवाड़ न हो।
शिकायतें होती रहीं, कार्रवाई कब होगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विद्यालय भवन पहले से जर्जर था और विभाग को इसकी सूचना भी दी गई थी, तो समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण क्यों नहीं कराया गया? बारिश के बाद लेंटर टूटने और कमरों में जलभराव की स्थिति सामने आने के बाद अब जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठने लगी है।
अभिभावकों का कहना है कि **बच्चों की सुरक्षा किसी भी विभागीय प्रक्रिया से बड़ी है।** अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रखता है या चोपता के 32 बच्चों को सुरक्षित विद्यालय भवन उपलब्ध कराने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाता है।


