दावों की सड़क पर सरकार दौड़ रही, गांवों की सड़क गड्ढों में!
रुद्रप्रयाग में विकास के सरकारी दावों की खुली पोल—10 साल पुरानी घोषणा भी फाइलों में!
30 किमी सारी-सणगू मार्ग पर गड्ढों का राज, सारी-विजराकोट में जान जोखिम में, ककोड़ाखाल-नाग सड़क का 2016 से इंतजार।
रुद्रप्रयाग। सरकार और उसके प्रतिनिधि बेहतर सड़क, मजबूत कनेक्टिविटी और गांव-गांव विकास के दावे कर रहे हैं, लेकिन रुद्रप्रयाग विधानसभा के ग्रामीण इलाकों की जमीनी तस्वीर इन दावों पर ही सवाल खड़े कर रही है। पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष ईश्वर सिंह बिष्ट ने सड़कों की बदहाली को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि सरकार के विकास के दावे कागजों में चमक रहे हैं, जबकि जमीन पर ग्रामीण आज भी गड्ढों, जर्जर सड़कों और अधूरी घोषणाओं के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
गड्ढामुक्त सड़क का दावा, सड़क में गड्ढों का साम्राज्य!
करीब 30 किलोमीटर लंबा सारी-सणगू मोटरमार्ग जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से क्षेत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। बिष्ट के मुताबिक सड़क की हालत इतनी खराब है कि अब यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।
पिछले वर्ष मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी स्तर से सड़कों को गड्ढामुक्त करने की घोषणा की गई थी, लेकिन बिष्ट का कहना है कि घोषणा के बावजूद इस मार्ग के गड्ढे नहीं भरे गए। उनके अनुसार इस वर्ष सड़क की स्थिति और भी खराब हो गई है।
सवाल सीधा है—जब गड्ढामुक्त सड़क का ऐलान हुआ था तो फिर यह सड़क गड्ढामुक्त क्यों नहीं हुई?
सारी-विजराकोट में कनेक्टिविटी नहीं, खतरे का सफर!
सारी-विजराकोट मोटरमार्ग की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बिष्ट के अनुसार वर्ष 2016-17 से शुरू हुआ यह मार्ग आज भी अपेक्षित स्थिति में नहीं पहुंच पाया है।
बेहतर कनेक्टिविटी के सरकारी दावों के बीच ग्रामीणों को खराब सड़क पर आवाजाही करनी पड़ रही है। उनका कहना है कि मार्ग की हालत ऐसी है कि लोगों को सफर के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
2016 की मुख्यमंत्री घोषणा, 2026 आ गया—सड़क फिर भी अधूरी!
सबसे बड़ा सवाल ककोड़ाखाल-नाग मोटरमार्ग को लेकर है। बिष्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत प्रस्तावित इस सड़क को लेकर वर्ष 2026 तक भी अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई दी।
यानी एक दशक बीत गया, लेकिन ग्रामीणों के सामने वही सवाल खड़ा है।
अगर गांव तक सड़क पहुंचाने में दस साल भी कम पड़ जाएं, तो फिर विकास की समयसीमा आखिर कितनी होगी?
कागजों में विकास की रफ्तार, धरातल पर सड़कें बेहाल!
ईश्वर सिंह बिष्ट ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खोखले वायदों और घोषणाओं से अब काम नहीं चलेगा। जनता को कागजों पर नहीं, जमीन पर विकास चाहिए।
उनका कहना है कि सरकार और उसके प्रतिनिधियों को सड़क की वास्तविक स्थिति मौके पर जाकर देखनी चाहिए। कागजी विकास और धरातली विकास में जमीन-आसमान का अंतर है।
रुद्रप्रयाग विधानसभा की इन सड़कों को लेकर उठे सवालों ने सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—घोषणाएं दस साल तक फाइलों में रहेंगी या कभी गांव की टूटी सड़क तक भी पहुंचेंगी?
अब जनता पूछ रही है सवाल
सड़क कब बनेगी? गड्ढे कब भरेंगे? 2016 की घोषणा कब धरातल पर उतरेगी? और ग्रामीणों को सुरक्षित सफर कब मिलेगा?
सरकार के विकास मॉडल की असली परीक्षा घोषणाओं के मंच पर नहीं, इन्हीं जर्जर ग्रामीण सड़कों पर होनी है।





