सरकार के विकास की खुली पोल! गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने के लिए उफनते नदी-नालों से जूझे ग्रामीण।
ईरानी गांव में सड़क बंद, सिस्टम बेबस! एंबुलेंस की जगह ग्रामीणों के कंधों पर अस्पताल पहुंची गर्भवती हेमा देवी।
चमोली।पहाड़ में विकास के सरकारी दावों की असली तस्वीर एक बार फिर सामने आ गई। दूरस्थ ईरानी गांव की गर्भवती हेमा देवी को प्रसव के लिए जिला अस्पताल पहुंचाने के दौरान ग्रामीणों को उफनते नदी-नालों से होकर गुजरना पड़ा। सड़क बंद होने के कारण एंबुलेंस और वाहन गांव तक नहीं पहुंच सके, तो ग्रामीणों और आशा कार्यकर्ता को महिला को लेकर खतरनाक रास्तों से निकलना पड़ा।
जिस समय सरकार को गर्भवती महिला के लिए एंबुलेंस और सुरक्षित सड़क उपलब्ध करानी चाहिए थी, उस समय ग्रामीण खुद ही सिस्टम बनकर मैदान में उतरने को मजबूर हो गए। बहते नदी-नालों को पार कर महिला को अस्पताल तक पहुंचाने की तस्वीरें सरकारी व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं।
सरकार गांव-गांव सड़क, स्वास्थ्य सुविधा और आपातकालीन सेवाओं के दावे करती है, लेकिन ईरानी गांव की यह तस्वीर उन दावों की जमीनी हकीकत सामने रखती है। सड़क बंद होने के बाद ग्रामीणों के लिए न कोई आसान रास्ता बचा और न ही मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था।
सवालों के घेरे में सरकारी सिस्टम
अगर सड़क बंद होने की जानकारी पहले से थी तो आपातकालीन मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? बरसात के मौसम में संवेदनशील गांवों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का बैकअप प्लान कहां है? गर्भवती महिला को नदी-नालों के बीच से गुजरने की नौबत आने तक जिम्मेदार विभाग क्या करते रहे?
ईरानी की हेमा देवी की मजबूरी सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि पहाड़ के उन गांवों की तस्वीर है जहां सड़क बंद होते ही स्वास्थ्य व्यवस्था भी मानो बंद हो जाती है।
अब ग्रामीणों का सवाल सीधा है—क्या सरकार की सड़क और स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ कागजों और सरकारी बयानों तक सीमित हैं, या बरसात में दूरस्थ गांवों की जिंदगी बचाने के लिए जमीन पर भी कोई व्यवस्था मौजूद है?


