महंगाई का करंट! ₹45 की चीनी ₹65 में, त्योहारों से पहले गरीब की जेब पर बड़ा वार।
चीनी के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, अब त्योहारों की मिठास पर भी महंगाई का साया—व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने उठाए सवाल।
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता, मिठाई से लेकर घर की चाय तक महंगी होने का असर—आम आदमी पूछ रहा सवाल, आखिर कब मिलेगी राहत?
रुद्रपुर। महंगाई से पहले ही परेशान आम आदमी के सामने अब त्योहारों से पहले एक और चिंता खड़ी हो गई है। रुद्रपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने चीनी के बढ़ते दामों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब ₹45 किलो बिकने वाली चीनी अब ₹65 किलो तक पहुंच गई है। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को और दबाव में ला दिया है।
त्योहारों की मिठास पर महंगाई की कड़वाहट!
आने वाले दिनों में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने से लेकर मेहमानों के स्वागत तक चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
त्योहारी सीजन में जब पहले ही कपड़े, राशन, यात्रा, पूजा सामग्री और अन्य घरेलू खर्च बढ़ जाते हैं, ऐसे में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में इजाफा आम परिवार के बजट को और बिगाड़ सकता है।
‘गरीब की चाय भी अब जेब पर भारी’
संजय जुनेजा का कहना है कि चीनी कोई विलासिता की वस्तु नहीं बल्कि आम परिवार की रोजमर्रा की जरूरत है। जब इसकी कीमत में करीब ₹20 प्रति किलो का अंतर आ जाए तो इसका सीधा असर घरेलू खर्च पर पड़ता है।
उनके मुताबिक, जिस परिवार के लिए हर महीने की आय में राशन और जरूरी खर्च का हिसाब मुश्किल से बैठता है, उसके लिए छोटी-छोटी कीमतों में बढ़ोतरी भी बड़ा बोझ बन जाती है। चाय जैसी रोजमर्रा की चीज भी अब गरीब परिवार को महंगी महसूस होने लगी है।
त्योहार आएंगे, खर्च बढ़ेगा—लेकिन आमदनी?
त्योहार खुशियां लेकर आते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई ने इन खुशियों के बजट पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। त्योहारों में मिठाई और पकवानों के लिए चीनी की मांग बढ़ने के साथ यदि कीमतें और बढ़ती हैं तो इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष ने सरकार से मांग की कि त्योहारों से पहले आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी निगरानी की जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक महंगाई का सामना न करना पड़े।
महंगाई पर सरकार के दावों की असली परीक्षा
चीनी के दामों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर महंगाई नियंत्रण को लेकर सरकार के सामने सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता के लिए सवाल सिर्फ चीनी के ₹20 महंगे होने का नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते घरेलू खर्च का है।
संजय जुनेजा ने कहा कि सरकार को महंगाई के आंकड़ों से आगे बढ़कर बाजार में आम आदमी को दिखाई देने वाली राहत सुनिश्चित करनी होगी। त्योहार सिर पर हैं और ऐसे समय में यदि जरूरी सामान की कीमतें बढ़ती रहीं तो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए त्योहार की खुशियां भी बजट के बोझ तले दब सकती हैं।**
अब सवाल—त्योहार की मिठास या महंगाई की कड़वाहट?
आम आदमी की उम्मीद है कि त्योहारों से पहले सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएगी। वरना बढ़ते खर्च और सीमित आय के बीच त्योहार मनाना भी कई परिवारों के लिए आर्थिक चुनौती बन सकता है।


