SIR पर उत्तराखंड में सियासी भूचाल! कांग्रेस का विस्फोटक दावा—‘लाखों वोटरों के नाम उड़ाने की तैयारी?
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पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने दागे चुनावी सिस्टम पर तीखे सवाल—एक व्यक्ति हजारों नामों पर आपत्ति कैसे लगा रहा? 25 लाख मतदाता नोटिस के घेरे में होने के दावे से मचा हड़कंप।
**हल्द्वानी से उठे SIR के सवाल अब पूरे उत्तराखंड की सियासत में आग लगाने लगे हैं।** मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया पर ऐसा हमला बोला है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस की SIR समिति के प्रदेश अध्यक्ष एवं केदारनाथ के पूर्व विधायक **मनोज रावत** ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।
कांग्रेस ने सवाल दागा है—**अगर यह सिर्फ मतदाता सूची की सफाई है तो लाखों मतदाता सवालों के घेरे में क्यों हैं? और अगर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो एक ही व्यक्ति हजारों नामों पर आपत्ति कैसे दर्ज करा रहा है?**
एक आपत्तिकर्ता, हजारों नाम! कांग्रेस बोली—‘यह कैसी व्यवस्था?’
कांग्रेस ने नैनीताल और ऊधमसिंह नगर की कई विधानसभा सीटों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दाखिल की गई हैं।
मनोज रावत ने सवाल उठाया कि यदि एक व्यक्ति हजारों मतदाताओं के नामों पर आपत्ति लगा रहा है तो ऐसी आपत्तियों की जांच किस स्तर पर हो रही है?
कांग्रेस ने मांग की कि ऐसी सभी आपत्तियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
1.07 लाख नामों पर फॉर्म-7! क्या इतनी बड़ी संख्या सामान्य है?
कांग्रेस के अनुसार प्रदेश में करीब 1.07 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के जरिए आवेदन किए गए हैं।
यही आंकड़ा अब कांग्रेस के हमले का बड़ा आधार बन गया है। पार्टी ने सवाल किया कि क्या इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया वास्तव में सामान्य पुनरीक्षण है या इसके पीछे किसी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है?
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक पक्ष सामने आना बाकी है।
25 लाख मतदाता नोटिस के घेरे में होने का दावा
कांग्रेस ने दावा किया कि करीब 25 लाख मतदाताओं को विभिन्न विसंगतियों अथवा मैपिंग से जुड़े कारणों से नोटिस जारी किए जाने की स्थिति बनी है।
अगर कांग्रेस का यह दावा सही है तो प्रदेश की मतदाता सूची के बड़े हिस्से पर इसका असर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने सवाल किया—क्या हर नोटिस पाने वाले मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पर्याप्त मौका मिलेगा? क्या किसी पात्र मतदाता का नाम सिर्फ तकनीकी या दस्तावेजी कमी के कारण कट सकता है?
पांच लाख घटे, फिर आठ लाख घटे… आखिर खेल क्या है?’
कांग्रेस ने मतदाता संख्या में कथित कमी को लेकर भी सरकार और चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा।
मनोज रावत के दावे के मुताबिक समरी रिवीजन के दौरान करीब पांच लाख नाम कम हुए, जबकि प्री-SIR चरण में भी करीब आठ लाख नाम घटने की बात सामने आई।
कांग्रेस के अनुसार करीब 79 लाख मतदाताओं के साथ प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि ड्राफ्ट सूची में करीब 71 लाख मतदाता दर्ज बताए जा रहे हैं।
इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने सीधा सवाल दागा—
“इतने लाख नाम आखिर गए कहां?”
DSE-PSE के नाम पर भी बड़ा सवाल
कांग्रेस ने DSE और PSE प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है।
मनोज रावत के अनुसार बड़ी संख्या में मतदाताओं को समान प्रविष्टि अथवा फोटो से जुड़ी समानता के आधार पर जांच/नोटिस की प्रक्रिया में लाया जा सकता है।
कांग्रेस का आरोप है कि ऐसी प्रक्रिया में वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
युवा वोटरों से लेकर गरीब तबके तक पर असर की आशंका
कांग्रेस ने दावा किया कि यदि प्रक्रिया में पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई तो इसका असर नए युवा मतदाताओं, गरीबों, मजदूरों, किसानों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है।
पार्टी का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में दस्तावेजी और तकनीकी प्रक्रिया की जटिलता के कारण आम मतदाता के लिए अपना पक्ष रखना आसान नहीं होता।
कांग्रेस का चुनाव आयोग से सीधा सवाल—जवाब कौन देगा?
मनोज रावत ने मांग की कि आपत्तियों की जांच पारदर्शी तरीके से हो, गलत आपत्तियां तत्काल खारिज की जाएं और किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे पर्याप्त अवसर दिया जाए।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों और नामों में हुए बदलाव का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अब निगाह चुनाव आयोग के जवाब पर
SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों ने उत्तराखंड में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। एक तरफ कांग्रेस इसे मताधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है, वहीं अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग और प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।
क्योंकि सवाल सिर्फ मतदाता सूची का नहीं है—
सवाल है उस वोट का, जिसके दम पर लोकतंत्र की सरकार बनती है।
फ्रंट-पेज बॉक्स
SIR पर कांग्रेस के 5 बड़े सवाल
5. पात्र मतदाता का नाम हटने से रोकने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?


