गोपेश्वर में बंदर-लंगूरों का बढ़ता आतंक, अब बच्चों पर भी हमले का खतरा! शिकायतों के बावजूद सिस्टम बेबस।
गणेश मंदिर के समीप सामने आई एक घटना ने शहर में बंदरों के आतंक की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया है। यहां एक अभिभावक अपने छोटे बच्चे के साथ जा रहा था, तभी अचानक एक बंदर ने उन पर हमला कर दिया। अभिभावक ने किसी तरह बच्चे को संभालते हुए खुद को भी सुरक्षित किया। इस घटना ने आसपास मौजूद लोगों को भी दहशत में डाल दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। गोपेश्वर के विभिन्न क्षेत्रों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। घरों की छतों, बाजारों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों के झुंड दिखाई देना आम हो गया है। कई बार बंदर लोगों के सामान और खाद्य सामग्री पर झपट पड़ते हैं, जिससे विवाद और हमले की स्थिति बन जाती है।
शिकायत करते-करते थक चुके हैं लोग
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन, नगर पालिका और वन विभाग से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों का कहना है कि कुछ समय के लिए बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन इसके बाद समस्या फिर जस की तस हो जाती है।
नगर पालिका द्वारा पूर्व में बंदरों को पकड़ने के लिए टीमें भी बुलाई गई थीं, लेकिन शहर में बंदरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कार्रवाई पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।
सवाल: आखिर कब जागेगा जिम्मेदार सिस्टम?
बंदरों के बढ़ते आतंक ने अब आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अकेले आने-जाने वाले लोगों को खतरा बना हुआ है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका और वन विभाग आपसी समन्वय से अभियान चलाकर बंदरों की समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान निकालें।
गोपेश्वर के नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी दिन बंदरों के हमले से गंभीर हादसा हो सकता है। अब देखना होगा कि लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिम्मेदार विभाग कब इस समस्या को गंभीरता से लेते हैं और शहरवासियों को बंदरों के आतंक से कब राहत मिलती है।


