छोटी मछली गिरफ्तार, आखिर ‘बड़ी मछलियां’ कब आएंगी पुलिस की पकड़ में?
17.15 ग्राम स्मैक, ₹8,200 नकद और तीन मोबाइल बरामद—साथी पुलिस को देखते ही फरार; सवाल बड़ा है, नशे की खेप आखिर पहुंचा कौन रहा है?
सितारगंज। शहर और आसपास के इलाकों में नशे के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने ग्राम नकुलिया क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 17.15 ग्राम स्मैक के साथ कुलदीप सिंह (32) को गिरफ्तार किया है। पुलिस को देखते ही मौके पर मौजूद अन्य युवक फरार हो गए, जबकि कुलदीप बाइक मोड़कर भागने लगा। घेराबंदी के बाद उसे घर के आंगन के बाहर पकड़ लिया गया।
आरोपी के कब्जे से 17.15 ग्राम स्मैक, ₹8,200 नकद, पल्सर बाइक UK06 BM 5190 और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। इनमें वीवो, सैमसंग गैलेक्सी और आईफोन-13 शामिल हैं। पुलिस ने 50 कागज के टुकड़े, छह फ्यूल पेपर और 15 पारदर्शी पन्नियां भी बरामद की हैं।
लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी से कहीं बड़ा है!
पुलिस ने एक युवक को पकड़ लिया, लेकिन सवाल यह है कि आखिर स्मैक की सप्लाई हो कहां से रही है? नशे की खेप सितारगंज तक पहुंचाने वाला नेटवर्क कौन चला रहा है? इसके पीछे कौन लोग हैं? पैसा और माल कहां से आ रहा है?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या पुलिस सिर्फ नीचे तक पहुंच रही है या उस नेटवर्क की जड़ तक भी जाएगी?
मौके से अन्य युवकों के फरार होने के बाद अब उनकी भूमिका भी जांच के घेरे में है। अगर गिरफ्तार आरोपी तक स्मैक पहुंची थी तो उसके पीछे मौजूद सप्लायर, बिचौलिए और पूरे नेटवर्क तक पुलिस कब पहुंचेगी?
‘छोटी मछली’ पकड़ने से खत्म नहीं होगा नशे का कारोबार
एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है, लेकिन सिर्फ एक गिरफ्तारी से नशे का नेटवर्क खत्म नहीं होगा। असली काम उस सप्लाई चेन को तोड़ना है जो युवाओं तक स्मैक पहुंचा रही है।
पुलिस की कार्रवाई पर अब निगाहें टिकी हैं—क्या जांच सिर्फ गिरफ्तार आरोपी तक सीमित रहेगी या नशे के कारोबार की ‘बड़ी मछलियों’ तक भी पहुंचेगी?


