चार महीने पहले बंधा था विवाह का बंधन, पीपलकोटी टनल हादसे ने छीन ली जिंदगी।

चार महीने पहले बंधा था विवाह का बंधन, पीपलकोटी टनल हादसे ने छीन ली जिंदगी।
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चार महीने पहले बंधा था विवाह का बंधन, पीपलकोटी टनल हादसे ने छीन ली जिंदगी।

टिहरी के प्रदीप पंवार की मौत से परिवार में मचा कोहराम।



पीपलकोटी/टिहरी। चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुआ हादसा टिहरी गढ़वाल के एक परिवार पर जिंदगी भर का गहरा जख्म छोड़ गया। हादसे में टिहरी जिले के 31 वर्षीय प्रदीप पंवार की मौत हो गई। प्रदीप के निधन की खबर जैसे ही उनके गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

प्रदीप पंवार गंवाल गांव, डाकघर काफलपानी, ब्लॉक थौलधार, प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले थे। परिवार के अनुसार, इसी साल 13 अप्रैल को प्रदीप का विवाह हटवाल गांव, सत्यों निवासी युवती से हुआ था। शादी को अभी महज चार महीने ही बीते थे। परिवार नई जिंदगी की शुरुआत और भविष्य के सपने संजो रहा था, लेकिन पीपलकोटी टनल हादसे ने अचानक सब कुछ उजाड़ दिया।

मां की मौत का गम अभी कम भी नहीं हुआ था

परिजनों के मुताबिक प्रदीप के परिवार में पिता, भाई, भाभी, पत्नी और छोटा भाई हैं। कुछ समय पहले ही उनकी मां का निधन हुआ था। परिवार अभी इस सदमे से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि प्रदीप की मौत की खबर ने परिजनों को फिर गहरे दुख में धकेल दिया।

एक ओर मां की मौत का दर्द और दूसरी ओर जवान बेटे को खोने का सदमा—परिवार पर एक साथ दो बड़ी त्रासदियां टूट पड़ी हैं।

अचानक पानी और मलबे ने मचाई तबाही

पीपलकोटी स्थित निर्माणाधीन टनल में हादसे के दौरान अचानक पानी और मलबे का बहाव आने की बात सामने आई है। देखते ही देखते टनल के भीतर हालात बिगड़ गए और वहां काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई।

पानी और मलबे के कारण बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण हो गया। राहत एवं बचाव टीमों ने लगातार अभियान चलाकर कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि हादसे में कई मजदूरों की जान चली गई।

चार महीने की शादी, अब जिंदगी भर का इंतजार

प्रदीप की मौत ने सबसे बड़ा सवाल उनकी नवविवाहित पत्नी के सामने छोड़ दिया है। जिस जीवनसाथी के साथ अभी वैवाहिक जीवन की शुरुआत ही हुई थी, वह अचानक हमेशा के लिए साथ छोड़ गया। गांव में प्रदीप की मौत की खबर पहुंचते ही परिवार और ग्रामीणों में मातम पसर गया।

पीपलकोटी टनल हादसा एक बार फिर निर्माणाधीन परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों के सामने अब अपनों को खोने का असहनीय दर्द है।


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