मोहनखाल–कणतोली–चोपता सड़क पर फिर उबाल, पूर्व विधायक मनोज रावत ने सरकार पर साधा निशाना।

मोहनखाल–कणतोली–चोपता सड़क पर फिर उबाल, पूर्व विधायक मनोज रावत ने सरकार पर साधा निशाना।
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मोहनखाल–कणतोली–चोपता सड़क पर फिर उबाल, पूर्व विधायक मनोज रावत ने सरकार पर साधा निशाना।



दो साल पुराने आश्वासन के बाद भी सड़क निर्माण में ‘एक इंच’ प्रगति नहीं होने का आरोप, बोले—जनता बार-बार नहीं छलेगी

मोहनखाल (रुद्रप्रयाग-चमोली सीमा)। मोहनखाल–कणतोली–चोपता मोटरमार्ग के निर्माण की मांग को लेकर एक बार फिर क्षेत्र में आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों के साथ आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया।

मनोज रावत ने कहा कि करीब दो वर्ष पहले सड़क निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्र में आंदोलन ने जोर पकड़ा था। माताओं-बहनों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आंदोलन को समर्थन दिया था। उनका आरोप है कि केदारनाथ उपचुनाव से पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त कराया गया, लेकिन दो वर्ष बीतने के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हुई।


उन्होंने कहा कि इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी केदारनाथ उपचुनाव से पहले अगस्त्यमुनि में सड़क निर्माण की घोषणा की थी। जनप्रतिनिधियों और सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद आज स्थिति यह है कि जमीनी स्तर पर काम शुरू होना तो दूर, संबंधित प्रक्रिया में भी कोई स्पष्ट प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।

पूर्व विधायक ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है और केंद्र व राज्य स्तर पर प्रभावशाली जनप्रतिनिधि इस मामले से जुड़े हैं, तो फिर दो साल में सड़क परियोजना आगे क्यों नहीं बढ़ पाई? उन्होंने कहा कि यह सड़क रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र से होकर प्रस्तावित है, ऐसे में वन संबंधी स्वीकृतियां महत्वपूर्ण हैं। सरकार और संबंधित जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए थी।

मनोज रावत ने कहा कि “यदि किसी जनप्रतिनिधि के आश्वासन पर आंदोलन समाप्त कराया जाता है और दो साल बाद भी स्थिति जस की तस रहती है, तो जनता का आक्रोश स्वाभाविक है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि आश्वासनों के बावजूद काम आगे न बढ़ने की कार्यप्रणाली से है।

उन्होंने संघर्ष समिति और आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों से भी अपील की कि पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए आंदोलन को मजबूत और संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाओं और फोटो सेशन से संतुष्ट होने वाली नहीं है। सड़क निर्माण की ठोस शुरुआत ही आश्वासनों की असली परीक्षा होगी।

मोहनखाल–कणतोली–चोपता मोटरमार्ग को लेकर अब ग्रामीणों की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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