भालू के हमले से महिला गंभीर घायल, ग्रामीणों की जान पर मंडरा रहा खतरा।
वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल।
कर्णप्रयाग।ग्राम भट्टक्वाली (चौरासैंण) में भालू के हमले में एक महिला के गंभीर घायल होने की घटना ने ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंताजनक तस्वीर सामने ला दी है। जंगलों से निकलकर जंगली जानवर अब आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है।
भालू के हमले में घायल महिला को उपचार के लिए उपजिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग पहुंचाया गया। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का सवाल है कि जब जंगली जानवर लगातार आबादी के आसपास सक्रिय हैं, तो वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था आखिर कहां है?
ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही के बावजूद यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। खेतों और जंगलों में काम करने वाले ग्रामीणों के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, जंगली जानवरों की निगरानी और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस एवं स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है।
एक महिला पर भालू का हमला महज एक घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते खतरे की चेतावनी है। सवाल अब यह है कि प्रशासन और वन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे?


