टनल हादसे पर प्रशासन सख्त, लापता श्रमिकों की तलाश में तेजी के निर्देश।
बंद सड़क-पेयजल लाइनों को भी तत्काल खोलने के आदेश।
**गोपेश्वर, 17 अगस्त।** चमोली में आपदा प्रभावित क्षेत्रों की बदहाल व्यवस्थाओं और टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे को लेकर सोमवार को गढ़वाल आयुक्त आनन्द स्वरूप ने अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा की। जिला सभागार गोपेश्वर में हुई बैठकों में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि रेस्क्यू अभियान में किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं आवश्यक सेवाओं की बहाली युद्धस्तर पर की जाए।
टीएचडीसी टनल हादसे की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि हादसे में कुल 22 श्रमिक प्रभावित हुए हैं। इनमें 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि आठ श्रमिकों की मौत हो चुकी है और दो श्रमिक अभी भी लापता हैं। सात रेस्क्यू किए गए श्रमिक जिला अस्पताल गोपेश्वर में उपचाराधीन हैं, जबकि एक को एम्स ऋषिकेश में उपचार दिया जा रहा है।
आयुक्त ने लापता श्रमिकों की तलाश को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रेस्क्यू अभियान में जुटी सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए। टनल के भीतर से तीन मशीनें हटाई जा चुकी हैं, जबकि एक एक्सकेवेटर और एक डम्पर को हटाने का काम जारी है। उन्होंने शेष मशीनरी को जल्द हटाकर टनल के अंदर खोज एवं बचाव अभियान को और तेज करने को कहा।
आयुक्त ने आरबीएनएल और टीएचडीसी के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही श्रमिकों के हितों को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने श्रम अधिकारी को टीएचडीसी परियोजना में कार्यरत श्रमिकों के पीएफ संबंधी अभिलेखों की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने तथा इसकी जानकारी श्रम आयुक्त को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
आपदा प्रभावित इलाकों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश
दूसरी समीक्षा बैठक में आयुक्त ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बंद सड़कों, पेयजल लाइनों और अन्य आवश्यक सेवाओं की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और संबंधित सड़क निर्माण एजेंसियों को बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल खोलने के निर्देश दिए। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की बंद सड़कों को जल्द खोलने पर जोर दिया गया, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक आवागमन और जरूरी सेवाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
पेयजल विभाग को आपदा से क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए गए। वहीं ब्राह्मसैण क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग के लंबित कार्यों में तेजी लाने को कहा गया।
आयुक्त ने कहा कि आपदा के समय केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पशुधन की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने पशुपालन विभाग को बीमार पशुओं के उपचार, पशु चिकित्सा सुविधाओं और चारे की उपलब्धता की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने गैरसैंण, फूलों की घाटी, चारधाम यात्रा मार्गों समेत संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अलग-अलग स्थानीय आपदा प्रबंधन एवं चिकित्सा कार्ययोजना तैयार करने को कहा। चिकित्सा और आयुष विभाग को आपदा के दौरान आपसी समन्वय से राहत एवं उपचार व्यवस्था संचालित करने के निर्देश दिए गए।
बैठकों में जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, उपजिलाधिकारी राज कुमार पांडे समेत विभिन्न विभागों, टीएचडीसी और संबंधित एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।


