चारधाम यात्रा के दावों की खुली पोल: जखोली के 38 किमी मार्ग पर न शौचालय, न स्वास्थ्य सुविधा, बदहाल सड़क से यात्री परेशान: अर्जुन सिंह गहरवार ।

चारधाम यात्रा के दावों की खुली पोल: जखोली के 38 किमी मार्ग पर न शौचालय, न स्वास्थ्य सुविधा, बदहाल सड़क से यात्री परेशान: अर्जुन सिंह गहरवार ।
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चारधाम यात्रा के दावों की खुली पोल: जखोली के 38 किमी मार्ग पर न शौचालय, न स्वास्थ्य सुविधा, बदहाल सड़क से यात्री परेशान: अर्जुन सिंह गहरवार ।

2013 आपदा की लाइफलाइन आज बदहाल, चिरबटिया-मयाली-सुमाड़ी मार्ग पर सुविधाओं का भारी अभाव।


रुद्रप्रयाग/जखोली। चारधाम यात्रा 2026 के दौरान जहां सरकार और प्रशासन यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बताने में जुटे हैं, वहीं जखोली क्षेत्र का चिरबटिया-मयाली-सुमाड़ी मोटरमार्ग इन दावों की जमीनी हकीकत उजागर कर रहा है। करीब 38 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यात्रियों के लिए न पर्याप्त शौचालय हैं, न स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क की हालत भी बेहद खराब बनी हुई है।

स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि यात्रा सीजन में इस मार्ग से बड़ी संख्या में वाहन गुजर रहे हैं, लेकिन पूरे रास्ते में एक भी व्यवस्थित सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं है। चिरबटिया में बना शौचालय भी पानी की कमी के चलते बंद पड़ा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को झेलनी पड़ रही है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल भी चिंताजनक है। मार्ग पर किसी भी आपात स्थिति या छोटी-मोटी बीमारी के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं है। यात्रियों का कहना है कि यदि रास्ते में कोई दुर्घटना या स्वास्थ्य समस्या हो जाए तो मदद मिलने में काफी दिक्कत होती है।

सड़क की स्थिति भी लगातार चिंता बढ़ा रही है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सड़कें और संकरे मोड़ यात्रा को जोखिमभरा बना रहे हैं। बारिश के दौरान कई हिस्सों में मार्ग बाधित होने की आशंका बनी रहती है, जिससे यात्रियों को घंटों जाम और परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गौरतलब है कि मयाली से गुप्तकाशी को जोड़ने वाला यह मार्ग वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान हजारों लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हुआ था। उस समय इस सड़क ने राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बावजूद इसके, आज भी यह मार्ग बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों की उपेक्षा झेल रहा है।

इस संबंध में पीसीसी  सदस्य अर्जुन सिंह गहरवार ने कहा कि “चारधाम यात्रा को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जखोली क्षेत्र का यह महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह उपेक्षित है। यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। यदि समय रहते सड़क सुधार, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। प्रशासन को इस मार्ग की गंभीरता समझते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।”

स्थानीय सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने कई बार इस सड़क को ऑल वेदर रोड परियोजना में शामिल करने की मांग उठाई, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। यात्रियों का कहना है कि मुख्य चारधाम मार्गों पर तो प्रशासनिक व्यवस्थाएं दिखाई देती हैं, लेकिन जखोली क्षेत्र का यह अहम रूट पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

चारधाम यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा की भी परीक्षा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस महत्वपूर्ण मार्ग की समस्याओं पर गंभीरता से संज्ञान लेगा या फिर बड़े दावे और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर यूं ही बना रहेगा।

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