बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता ने बताया कि डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला रोग है, जिसका संक्रमण काल सामान्यतः जुलाई से नवंबर तक रहता है। उन्होंने बताया कि जनपद में डेंगू मरीजों के उपचार के लिए 25 आइसोलेटेड बेड की व्यवस्था की गई है तथा मच्छरदानियों सहित आवश्यक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने ग्रामीण विकास, पंचायती राज, नगर निकाय, जल संस्थान, सिंचाई, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास तथा आपदा प्रबंधन सहित 15 विभागों को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर जनजागरूकता और रोकथाम संबंधी गतिविधियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
उन्होंने डेंगू के प्रजनन स्थलों की पहचान कर उन्हें तत्काल नष्ट करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कूलर, पुराने टायर, गमले, पानी की टंकियों और अन्य स्थानों पर जमा साफ पानी में मच्छरों का लार्वा विकसित न होने दिया जाए।
जिलाधिकारी ने नगर निकायों को जून से सितंबर तक नियमित फॉगिंग अभियान चलाने, कूड़ा डंपिंग स्थलों पर कीटनाशक छिड़काव सुनिश्चित करने तथा विशेष स्वच्छता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए।
विद्यालयों में भी डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। मुख्य शिक्षा अधिकारी को स्कूल परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने, जलभराव रोकने और विद्यार्थियों को बचाव के उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन की अपील: घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और डेंगू-मलेरिया के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।


