शासनादेश न होने से फूटा गुस्सा: सिमली में जनता ने निकाला कैंडल मार्च।

शासनादेश न होने से फूटा गुस्सा: सिमली में जनता ने निकाला कैंडल मार्च।
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शासनादेश न होने से फूटा गुस्सा: सिमली में जनता ने निकाला कैंडल मार्च।

विधानसभा चुनाव बहिष्कार की चेतावनी।

बेस नहीं तो वोट नहीं' के नारों से गूंजा बाजार।


कर्णप्रयाग (सिमली)।

महिला बेस अस्पताल सिमली को पूर्ण बेस अस्पताल के मानकों के अनुरूप संचालित करने की मांग को लेकर क्षेत्र का जन-आक्रोश एक बार फिर उबाल पर है। रविवार (7 जून) को बेस अस्पताल संघर्ष समिति, सिमली के तत्वावधान में स्थानीय जनता और व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सिमली बाजार में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने "बेस नहीं तो वोट नहीं" के गगनभेदी नारे लगाते हुए आगामी विधानसभा चुनाव के सामूहिक बहिष्कार की दो टूक चेतावनी भी दी।

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कैंडल मार्च शाम ठीक 7:00 बजे सिमली पेट्रोल पंप के पास से शुरू हुआ। संघर्ष समिति के अध्यक्ष व पूर्व भाजपा नगर मंडल महामंत्री देवेंद्र नेगी के नेतृत्व में लगभग 150 से 180 स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और व्यापारियों ने मुख्य बाजार से होते हुए अस्पताल परिसर तक शांतिपूर्वक मार्च किया। अस्पताल परिसर में पहुंचकर एक सभा का आयोजन किया गया, जो रात 8:00 बजे शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी शासनादेश न मिलने से नाराजगी

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महिला बेस अस्पताल सिमली को उच्चीकृत कर पूर्ण बेस अस्पताल बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है। पूर्व में हुए उग्र आंदोलनों के बाद, राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में इस अस्पताल को बेस अस्पताल के रूप में संचालित करने की विधिवत घोषणा की गई थी।

मुख्यमंत्री की इस बड़ी घोषणा के बाद जनता ने अपने आंदोलन स्थगित कर दिए थे। लेकिन घोषणा के महीनों बाद भी आज तक शासन स्तर से इसका आधिकारिक शासनादेश (GO) जारी नहीं किया गया है। सरकारी सुस्ती और शासनादेश में हो रही देरी के कारण अब क्षेत्रीय जनता और संघर्ष समिति में सरकार के खिलाफ गहरा असंतोष व्याप्त हो गया है।

मांग पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की तैयारी

संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही शासनादेश जारी कर अस्पताल को मानकों के अनुसार शुरू नहीं किया, तो बैठकों का दौर बन्द कर सीधे बड़े स्तर पर आंदोलनात्मक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च में समिति के संरक्षक महेश डिमरी, सचिव शंभू प्रसाद बहुगुणा, चूलाकोट के ग्राम प्रधान भरत लाल, प्रकाश चंद सेमवाल, भास्करानंद डिमरी, बीना डिमरी, पूनम खंडूड़ी सहित भारी संख्या में स्थानीय मातृशक्ति और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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