भूधंसाव से थर्राया चमोली का ब्रह्मसैण!
18 हजार की आबादी की आवाजाही पर संकट, बनते ही फिर टूटा पुस्ता; स्कूली बच्चों, महिलाओं और बीमारों की राह हुई मुश्किल।
**चमोली।** जिले के ब्रह्मसैण क्षेत्र में भूधंसाव और लगातार बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब **18 हजार की आबादी को जोड़ने वाली सड़क के क्षतिग्रस्त होने से दर्जनों गांव मुख्यधारा से कटने के कगार पर हैं।** सड़क टूटने से रोजमर्रा की आवाजाही से लेकर बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की आवाजाही और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने तक की चुनौती खड़ी हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि **जिस सड़क को जोड़ने और दुरुस्त करने का काम शुरू किया गया था, वह बारिश के दबाव में दोबारा क्षतिग्रस्त कैसे हो गई?** ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर काम तो शुरू हुआ, लेकिन बरसात के बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
काम हुआ, लेकिन सड़क फिर धरी रह गई
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सड़क के टूटे हिस्से की मरम्मत के बाद उनकी परेशानी खत्म होगी, लेकिन बारिश ने एक बार फिर व्यवस्था की पोल खोल दी। सड़क का हिस्सा दोबारा क्षतिग्रस्त होने से लोगों की मुश्किलें जस की तस बनी हुई हैं।
स्थानीय स्तर पर मजदूरों की कमी भी काम की रफ्तार में बड़ी बाधा बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बरसात के मौसम में सड़क पहले से संवेदनशील थी, तो समय रहते पर्याप्त संसाधन और मजदूर क्यों नहीं जुटाए गए?
स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर मरीजों तक पर संकट
सड़क टूटने का सबसे ज्यादा असर आम ग्रामीणों पर पड़ रहा है। **स्कूली बच्चों को आवाजाही में परेशानी, महिलाओं को जरूरी कामों के लिए आने-जाने में दिक्कत और बीमार व बुजुर्ग लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने का संकट** पैदा हो गया है।
सड़क संपर्क बाधित होने से स्थानीय बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार से जुड़ी गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों के सामने अब सिर्फ आवाजाही का नहीं, बल्कि **रोजी-रोटी का संकट** भी खड़ा होने लगा है।
सरकार के दावों पर सवाल—कब मिलेगी स्थायी राहत?
बारिश आते ही पहाड़ों में सड़कें टूटना कोई नई बात नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि **हर साल मरम्मत के नाम पर काम होने के बावजूद सड़कें दोबारा क्यों टूट जाती हैं?** क्या संवेदनशील इलाकों में स्थायी समाधान की जगह केवल अस्थायी मरम्मत तक ही व्यवस्था सीमित है?
ब्रह्मसैण क्षेत्र की स्थिति ने शासन-प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। **18 हजार की आबादी की आवाजाही प्रभावित होने के बावजूद यदि सड़क को जल्द और सुरक्षित तरीके से बहाल नहीं किया गया, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।**
ग्रामीणों की मांग है कि सड़क को जल्द से जल्द **स्थायी और सुरक्षित तरीके से बहाल किया जाए, पर्याप्त मजदूर और मशीनरी लगाई जाए तथा दोबारा सड़क टूटने की समस्या का ठोस समाधान निकाला जाए।** अब देखना होगा कि प्रशासन कागजी आश्वासनों से आगे बढ़कर जमीन पर कब तक काम शुरू करता है।


